राजस्थान हाईकोर्ट ने गुर्जर आरक्षण के दौरान अदालती आदेश की अवमानना के मामले में राज्य सरकार की ओर से समय मांगने पर मौखिक टिप्पणी की है।
अदालत ने कहा कि सरकार या तो अपनी अवमानना याचिका वापस ले या फिर अवमाननाकर्ताओं को सजा दिलाए। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण की सुनवाई 23 मार्च तक टाल दी है। न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब पेश करने के लिए समय मांगा गया। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि प्रकरण समुदाय से जुड़ा हुआ है। ऐसे में प्रकरण की सुनवाई एक माह बाद नियत की जाए। इस पर अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए मामले की सुनवाई 23 मार्च तक टाल दी।
गौरतलब है कि अदालत ने अदालती आदेश के बावजूद गुर्जर आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा के मामले में गुर्जर नेताओं के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की थी।