राजस्थान हाईकोर्ट ने सजा पूरी होने के बावजूद कैदी को दस माह तक रिहा नहीं करने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत में उपस्थित जेल डीजी को आदेश जारी कर कैदी को तत्काल रिहा करने को कहा है। अदालत ने दोषी अफसरों पर विभागीय कार्रवाई की मंशा भी जताई है।
इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को छूट दी है कि वह राज्य सरकार से क्षतिपूर्ति वसूलने के लिए अलग से याचिका दायर कर सकता है। न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश गोरधन बाढ़दार की खंडपीठ ने यह आदेश सुशीलसिंह पंवार की ओर से दायर बन्दी प्रत्यक्षीकरण याचिका का निस्तारण करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान जेल डीजी अदालत में पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट की ओर से आरोपी की सभी सजाओं को साथ चलाने के गत 8 मार्च के आदेश के बाद कैदी की सजाओं को साथ चलाया गया। इसके अलावा उसे रिहा करने की प्रक्रिया आरंभ की जा चुकी है।