राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने राज्य सरकार को राहत देते 31 मार्च 2017 को जारी आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया है।
जस्टिस निर्मलजीत कौर की अदालत में सीताराम व अन्य निजी बस ऑपरेटर्स की ओर से चुनौती याचिकाएं दायर की गई थीं। याचिका में बताया गया कि राज्य सरकार ने ग्रामीण रूट्स पर 2013 में लोक परिवहन सेवा के नाम से बसों का संचालन करने की अनुमति दी गई थी। साथ ही, सरकार ने वीजीएफ के तहत आठ रुपए प्रति किलोमीटर की दर से देय राशि तय की थी। सरकार ने इस साल 31 मार्च 2017 को एक आदेश निकालते हुए वीजीएफ के तहत दी जा रही राशि को बंद करने का आदेश जारी कर दिया है।
सरकार की ओर से पक्ष रखते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश पंवार व उनके सहयोगी सुनील जोशी ने कहा कि सरकार ने ग्रामीण रूट्स पर निजी बस ऑपरेटर्स को इस योजना से जोड़ा था, लेकिन अब निजी ऑपरेटर्स की आय हो रही है जबकि सरकार की राजस्व में कमी हो रही है। ऐसे में जब पर्याप्त राशि किराये के रूप में मिल रही है तो सरकार द्वारा अतिरिक्त राशि नहीं दी जा सकती है।
जस्टिस कौर ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद निजी ऑपरेटर्स की याचिकाओं को खारिज करते हुए सरकार को राहत दी है। इससे सरकार पर अतिरिक्त राजस्व भार भी कम होगा।