भगवान जगन्नाथ के साथ बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र के श्रीविग्रह
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कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया में क्वारंटाइन शब्द को नए सिरे से चलन में ला दिया है। कोरोना संक्रमित होते ही व्यक्ति को क्वारंटाइन कर दिया जाता है, लेकिन राजस्थान के कोटा में भगवान क्वारंटाइन किए गए हैं, क्योंकि वे बीमार हो गए हैं। उन्हें इलाज स्वरूप भोग में लौंग, कालीमिर्च व तुलसी पत्र अर्पित किए जा रहे हैं।
कोटा के रामपुरा इलाके में भगवान जगदीश का मंदिर है। पिछले साल वैश्विक कोरोना महामारी फैलते ही जगदीश मंदिर के भी कपाट बंद कर भगवान को क्वारंटाइन कर दिया गया था। हालांकि मंदिर के पुजारियों का कहना है कि यह परंपरा पिछले साल महामारी के कारण शुरू नहीं हुई, बल्कि यह 25 साल पुरानी है।
जेठ माह की पूर्णिमा के बाद जब भगवान जगदीश 'बीमार' होते हैं तो उसके पहले मंदिर के पुजारी भगवान जगदीश की प्रतिमा का 108 मटकों के जल से अभिषेक यानी कि स्नान करवाया जाता है। 200 किलो आम के रस का भोग चढ़ाकर दही, दूध, शहद आदि से अभिषेक होता है। यह परंपरा ओडिशा के पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ के मंदिर में भी निभाई जाती है।
माना जाता है कि गर्मी के मौसम में भगवान 'बीमार' हो जाते हैं। इसीलिए एक पखवाड़े तक उनके मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस दौरान पवित्र तुलसी, काली मिर्च और लौंग से उनको भोग लगाकर इलाज किया जाता है। इसके बाद अगले एक पखवाड़े में मंदिर के कपाट खोल कर भगवान जगदीश की शोभायात्रा निकाली जाती है। भगवान एक पखवाड़े बाद स्वस्थ होंगे और आम श्रद्धालुओं को 10 जुलाई को दर्शन देंगे क्योंकि इसी दिन कपाट खुलने हैं।