सामाजिक कुरीतियों में जकड़े समाज को अभी इनसे बाहर निकलने में शायद और समय लग सकता है। विशेषकर राजस्थान जैसे प्रदेश में जहां बाल विवाह और छुआछत जैसी कुप्रथा अभी तक ग्रामीण परिवेश का अहम हिस्सा है। ऐसा ही कुछ अजमेर के अरई गांव में वर्षों से देखने को मिल रहा है।
इस गांव में कोई दलित दूल्हा घोड़ी पर बैठकर दुल्हन को ब्याहने नहीं जाता है। सवर्ण समाज की दबंगई के चलते दलित दूल्हे को पैदल ही जाना होता है। लेकिन बृहस्पतिवार को दूल्हे प्रधान बैरवा घोड़ी पर भी चढ़ा और गाजे बाजे उसकी बिंदौरी भी निकली। वर्षों बाद यहां एेसा हुआ कि किसी दलित दूल्हे की बारात इस तरह निकली हो।