जयपुर के सांसद रामचरण बोहरा ने सुझाव दिया है कि हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हिंदी में हस्ताक्षर करने सहित कई अनिवार्यताएं लागू होनी चाहिए।
सासंद बोहरा शुक्रवार को दिल्ली में केन्द्रीय हिन्दी सलाहकार समिति की आयोजित पहली बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु एक कोष की स्थापना की जाए और उक्त कोष में अंशदान के रूप में दी जाने वाली राशि को कर मुक्त भी रखा जाए।
बोहरा ने कहा कि हिन्दी का वर्तमान परिस्थितियों में प्रचलन बढ़ाने के लिए राजकीय कार्यालयों द्वारा प्रकाशित किए जाने वाले विज्ञापनों का प्रकाशन हिन्दी में किए जाने का प्रावधान करने, राजकीय कार्यालयों की वेबसाईट, ऐप हिन्दी में बनाए जाने, सभी सरकारी कर्मचारियों के हस्ताक्षर को हिन्दी में किया जाना अनिवार्य करने का सुझाव दिया।
बोहरा ने सुझाव दिया कि विभिन्न राजनीतिज्ञों, अभिनेताओं, अभिनेत्रियों, राजदूतों, प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सार्वजनिक भाषण हिन्दी में प्रस्तुत करने का प्रावधान किया जाना चाहिए। सभी सरकारी, गैर सरकारी क्षेत्रों की नौकरियों में साक्षात्कार के दौरान हिन्दी में और हिन्दी से संबंधित प्रश्न पूछने की अनिवार्यता होनी चाहिए। उन्होंने देश के उत्तर-पूर्वी और दक्षिणी राज्यों में हिन्दी में विशेष पाठ्यक्रम प्रारंभ करने और इनके लिए विश्वविद्यालयों की स्थापना पर जोर दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि हिन्दी भाषा में पुस्तकों का प्रकाशन करने वाले लेखकों और प्रकाशकों को प्रोत्साहित करने हेतु सरकार द्वारा लिए जाने वाले संबंधित करों में छूट का प्रावधान किया जाए। साथ ही केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से और विभागों से निकाले जाने वाले आदेश, संकल्प, निविदा, नोटिस, समझौता पत्र, परमिट आदि को अनिवार्यतः हिन्दी में प्रकाशित करने की व्यवस्था होनी चाहिए।