प्रदेश में कानून की पढ़ाई करवाने वाले कॉलेजों की मान्यता पर एक बार फिर मान्यता नहीं मिलने की तलवार लटकी हुई है। इसका कारण व्याख्याताओं की कमी होना है। इसके बावजूद आरपीएससी गंभीर नहीं है।
जानकारी के अनुसार, कॉलेज व्याख्याताओं की कमी के कारण पिछले सत्र में भी इसी तरह की परेशानी सामने आई थी। जिसके बाद एकबारगी तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने लॉ कॉलेजों को मान्यता देने से इनकार भी कर दिया था। इस पर कॉलेज आयुक्त ने अप्रेल 2017 तक व्याख्याताओं की नियुक्ति करवाने की बात कही थी, तब जाकर मान्यता को जारी रखा गया। लेकिन अब तक उनका यह काम पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में करीब 15 लॉ कॉलेजों पर फिर से मान्यता नहीं मिलने की तलवार लटक सकती है।
उधर, दूसरी तरफ व्याख्याताओं की नियुक्ति को लेकर आरपीएससी गंभीर नजर नहीं आ रहा है। आरपीएससी की ओर से व्याख्याताओं के साक्षात्कार को अटकाया जा रहा है। सत्र 2016-17 की मान्यता भी बीसीआई ने नहीं दी थी, किन्तु बाद में कॉलेज आयुक्त द्वारा अप्रैल 2017 तक 86 कॉलेज व्याख्याता की नियुक्ति करने की अंडरटेकिंग देने के बाद 10 जनवरी 2017 को एलएलबी प्रथम वर्ष में प्रवेश की अनुमति दी गई थी।
बीसीआई नियमानुसार एक कॉलेज में 8 कॉलेज व्याख्याता एवं 1 प्राचार्य होना चाहिए। जबकि हकीकत में स्थिति इसके बिल्कुल विपरित नजर आती है।