जननी सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों की पोल खुल गई। तीन मामलों ने प्रसूताओं की सुरक्षा को लेकर सरकार के सामने सवाल खड़े कर दिए।
पहला सनसनीखेज मामला प्रदेश के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया के क्षेत्र उदयुपर से जुड़ा है। यहां के कोटड़ा तहसील स्थित बिलवल तालाब गांव में खराब सड़क के कारण एंबुलेंस 104 प्रसूता तक नहीं पहुंच सकी। ऐसे में उसने अपने घर में ही बच्चे का जन्म दे दिया। इसके बाद आनन-फानन में परिजन जच्चा-बच्चा को झोले में लकड़ी के बांस के सहारे लटकाकर करीब दो किलोमीटर दूर खड़ी एंबुलेंस तक लेकर गए। जिसके बाद उसे एंबुलेंस के जरिये अस्पताल पहुंचाया गया।
उधर, इस गंभीर मामले पर कोई भी अधिकारी साफ-साफ कहने से बचता रहा। इनका कहना था कि हमने समय पर एंबुलेंस भिजवा दी थी, लेकिन खराब सड़क के कारण वह मौके तक नहीं पहुंच सकी। वहीं, प्रदेश की सड़कों के खराब हालात के कारण सवाल उठता है कि आजादी के सत्तर साल बाद भी आज कई इलाके ऐसे हैं जहां तक सरकार अच्छी सड़क तक उपलब्ध नहीं करवा सकी।