राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनावों में इस बार के चुनाव परिणाम देखकर कहा जा सकता है कि इतिहास अपने आप को दोहराता है। लगातार दूसरे साल एबीवीपी संगठन से बागी होने वाले छात्रनेता ने जीत हासिल की है। इस बार एबीवीपी से बागी पवन यादव 5359 वोट हासिल कर अध्यक्ष बने हैं। वहीं पिछले साल एबीवीपी के बागी अंकित धायल ने चुनाव जीता था।
बगावत राजस्थान यूनिवर्सिटी के इन चुनावों में छात्रनेताओं को बहुत रास आ रही है। मतलब यह कि अब तक जितने भी छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए हैं, उनमें संगठन से बगावत करने वालों की संख्या काफी है। फिर चाहे एबीवीपी हो या एनएसयूआई, बगावत करने वाले प्रत्याशी छात्रों की पसंद भी बनते हैं।
अब तक 34 छात्रसंघ अध्यक्ष बने हैं, जिनमें से करीब 17 ऐसे हैं, जिन्होंने अपने संगठन से बगावत की थी। पवन यादव को मिलाकर अब 18 अध्यक्ष ऐसे हो गए हैं, जिन्होंने अपने संगठन के बिना चुनाव लड़ा।
दरअसल राजस्थान यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव 1967 से हुई थी। पहले छात्रसंघ अध्यक्ष आदर्श किशोर सक्सेना अप्रत्यक्ष रूप से चुने गए थे। अध्यक्ष पद पर कब्जा करने वाली अकेली छात्रा रही है प्रभा चौधरी। प्रभा ने साल 2011-12 में चुनाव जीत कर इतिहास बनाया था। प्रभा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और एबीवीपी और एनएसयूआई को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। वहीं, एबीवीपी ने अब तक 9 अध्यक्ष और एनएसयूआई 5 अध्यक्ष बना चुकी है।
एक बार फिर एबीवीपी के बागी पवन ने फिर इस बात को साबित कर दिया है, बागी प्रत्याशी ही छात्रों की पहली पसंद बनता है।