भाजपा के नव नियुक्त अध्यक्ष सीपी जोशी की नियुक्ति को अभी 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए हैं कि प्रदेश के आला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के बीच फुसफुसाहटों और चर्चा का दौर शुरू हो चुका है। नए अध्यक्ष सीपी जोशी ने अभी अपना पदभार भी ग्रहण नहीं किया कि प्रदेश भाजपा में चल रही गुटबाजी के बीच में पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं में सुरक्षित गुट को अपनाने और उसमें अपनी जगह बनाने की होड़ शुरू हो चुकी है।
गुरुवार को जोशी की घोषणाओं के बाद से ही प्रदेश कार्यालय में पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं का आना शुरू हो गया जो पिछले चार साल से गायब थे। साथ ही शुरू हो गया अटकलों का सिलसिला, जिसमें जोशी किस गुट के साथ जाएंगे इसपर बहस तक सुनी जाने लगी।
सीपी जोशी ट्वीट
- फोटो : Amar Ujala Digital
राजे समर्थकों में उत्साह
जोशी को वसुंधरा राजे ने युवा मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया था और जानकर जोशी के कार्यकाल को अधिकतम सफल कार्यकाल बताते हैं। चूंकि वसुंधरा राजे और जोशी ने एक साथ काम किया इसलिए अब राजे समर्थक इसको वसुंधरा राजे की जीत के रूप में देख रहे हैं। राजे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र का कदम मान रहे हैं। गुरुवार को जोशी के नियुक्ति के बाद राजे ने ट्विटर पर जोशी को बधाई दी थी, जिसके जवाब में जोशी ने राजे का धन्यावाद देते हुए सहयोग और मार्गदर्शन की उम्मीद की बात लिखी जिसको लेकर वसुंधरा राजे समर्थकों में एक ऊर्जा का संचार देखने को मिला और कई समर्थकों ने जोशी के ट्वीट को अपने व्हाट्सएप सटेटस पर शेयर कर डाला था।
जोशी हमेशा ही विवाद से दूर रहे
हाड़ौती संभाग के कार्यकर्ता जोशी को ओम बिरला के साथ जोड़कर भी देख रहे हैं। जोशी हमेशा ही विवाद से दूर रहे हैं, कम बोलना और सबका सम्मान करना जोशी की आदत में शुमार रहा है। जोशी के ट्वीट से जोशी ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि भाजपा के सभी वर्ग और पदाधिकारियों का मार्गदर्शन और सहयोग लेकर ही वो भाजपा की प्रदेश इकाई को चुनावी रण में लेकर उतारने वाले हैं, जिसकी भारी कमी अभी तक भाजपा प्रदेश इकाई में देखने को मिली थी।
वहीं, प्रदेश का ब्राह्मण समाज जोशी के अध्यक्ष बनने को अपनी जीत मान रहा है तो जाट इसका विरोध कर रहे हैं। नव प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं, जोशी किस प्रकार से भाजपा की प्रदेश इकाई को संभालते हैं, यह देखना रोचक होगा।