जिनकी आंखों में उज्जवल भविष्य का सपना देखा जाता है अगर हमारा सिस्टम उन्हें ही बचाने में सफल नहीं है तो चिंता होना लाजिमी है।
उत्तर प्रदेश के दो जिलों के साथ राजस्थान का बांसवाड़ा भी नवजातों की कब्रगाह बन गया है।
बांसवाड़ा के प्रमुख सरकारी अस्पताल में बीते करीब दो माह में 90 नवजात दम तोड़ चुके है।
हालात यह है कि राजस्थान सरकार तक इन मौतों की चीख 60 नवजात की मौत के बाद पहुंची। लेकिन कार्रवाई करते-करते 30 और मासूम मौत की नींद सो चुके थे।
अब शुरू की कार्रवाई
स्वास्थ्य मंत्री राजस्थान
अब राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सर्राफ ने इन मौतों के लिए आठ चिकित्सकों को दोषी मानते हुए कार्रवाई की है।
जिसमें पीएमओ सहित तीन चिकित्सकों का निलंबित किया गया है जबकि पांच चिकित्सकों को एपीओ करने के आदेश जारी किए गए है।
जांच कमेटी की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई में पीएमओ डॉ वी के जैन, गायनी विशेषज्ञ डॉ पी सी यादव व ब्लॉक पीएमओ डॉ जीतेन्द्र बंजारा को निलंबित किया गया।
जबकि आरसीएचओ डॉ मनीषा चौधरी, गायनी डॉ दिव्या पाठक, डॉ ओ पी उपाध्याय, डॉ जयश्री जैन व डॉ शालिनी नानावटी को एपीओ किया गया है।
जांच कर रही है सरकार
फाइल फोटो।
गौरतलब है कि यहां नवजातों की हो रही मौत के अलग-अलग कारण बताए गए है। ज्यादातर मौत नवजात के कम वजन से होना बताई गई है।
वहीं प्रसूताओं को समुचित पोषक आहार भी नहीं मिलना कारणों में सम्मलित होना बताया गया है।