भीनमाल से भाजपा विधायक पूराराम चौधरी को धोखाधड़ी के एक मामले में अदालत से राहत मिल गई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायालय क्रम-9 ने विधायक पूराराम चौधरी के खिलाफ निचली अदालत की ओर से धोखाधड़ी को लेकर लगाए गए चार्ज तय करने के आदेश को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि पूराराम ने परिवादी रघु शर्मा से किसी तरह की राशि प्राप्त नहीं की है। जबकि इस प्रकरण से जुड़े मुकुल शर्मा के साथ यदि कोई धोखाधडी हुई है तो उसके संबंध में रघु शर्मा को कार्रवाई करने का कोई अधिकार नहीं है।
निगरानी याचिका में अधिवक्ता विपुल शर्मा ने बताया कि पूराराम ने वर्ष 1994 में आवासन मंडल में पंजीकरण कराते समय 50 हजार रुपए जमा कराए थे। 1996 में आवासन मंडल के मांगने पर 50 हजार रुपए के रूप में पहली किश्त जमा कराई गई। इसके बाद मंडल ने 2008 में पूराराम को इंदिरागांधी नगर में भूखंड आवंटित कर दिया।
पूराराम ने मुकुल शर्मा के पक्ष में पावर ऑफ अटोर्नी बना दी। इसके बाद मुकुल शर्मा ने इस भूखंड के संबंध में 26 अगस्त 2008 को रघु शर्मा से एग्रीमेंट कर लिया। रघु शर्मा की ओर से कहा गया कि मुकुल शर्मा को अधिकार देने के बाद पूराराम ने भूखंड की कीमत बढ़ने पर उसका कब्जा ले लिया और भूखंड को चेतन शर्मा को भी बेच दिया। जिस पर सुनवाई करते हुए निचली अदालत ने पूराराम के खिलाफ आईपीसी की धारा 420 के तहत आरोप तय किए। जिसे एडीजे अदालत में चुनौती दी गई। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने निचली अदालत की ओर से किए गए आरोप तय के आदेश को रद्द कर दिया है।