जैसे-जैसे वो बड़ा होता गया, परिवार की खुशी काफूर होती गई। घर में बेटे होने के बाद जो खुशियां आई थी, वो इस बात के सामने आने के बाद गायब हो गई कि बेटा मानसिक विक्षिप्त है।
जैसलमेर के रहने वाले उगाराम के घर 18 वर्ष पहले स्वरूपाराम ने जन्म लिया। उगाराम का बेटा स्वरूपाराम बचपन से ही मानसिक विमंदित है। बेटा शरीर से तो बड़ा होता गया, लेकिन सोच समझ व दिमाग से बच्चा ही बना रहा। जिस पर परिवार को उसकी चिंता दिन रात खाने लग गई। उसकी अजीबोगरीब हरकत से, खुद को नुकसान पहुंचाने पर उसके बेडि़यों में जकड़कर रखा जाने लगा। स्वरूपाराम के पिता की आंखों में चमक की जगह आंसूओं ने ली। उगाराम अपने बेटे के ईलाज के लिए भी कई जगह घूमा, लेकिन आखिर थक हार कर उसे घर में एक कमरे में बंद ही करना पड़ा।