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अदालत की आतंकियों को नसीहत, कुरान पर 1 फीसदी अमल करने वाले नासमझ भी नहीं करते ऐसा काम

Wed, 06 Dec 2017 09:05 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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कोर्ट में पेशी के लिए जाते लश्कर के आतंकी - फोटो : Amar Ujala
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अदालत ने कुरान सहित विभिन्न धर्मग्रंथों में मानवता को लेकर दिए गए पवित्र संदेशों की अव्हेलना करने वालों के खिलाफ गम्भीर टिप्पणियां की है। जयपुर की एडीजे अदालत ने ये टिप्पणियां मुम्बई हमले के मास्टर माइंड आतंकी हाफिज सईद के संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आठ आतंकियों को आजीवन कारावास की सजा के आदेश में की हैं।
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अदालत ने आदेश में दोषियों के लिए कहा कि कुरान पवित्र है और इसका अध्ययन व अमल करने वाले मानवता के खिलाफ जा ही नहीं सकते। अदालत ने यहां तक कहा है कि कुरान के पैगाम पर 1 प्रतिशत भी अमल करने वाला कोई नासमझ भी आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए सोच भी नहीं सकता। अदालत ने कहा कि कोई भी धर्म या धर्मग्रंथ हिंसा फैलाने की बात नहीं करता है।

अदालत ने आगे कहा कि कोई भी धर्म या धर्मग्रंथ हिंसा फैलाने की बात नहीं करता है। आज जयपुर के कोर्ट नंबर 17 के एडीजे पवन गर्ग ने लश्कर-ए-तैयबा के आठ आतंकियों को देश में दंगा फैलाने और अन्य आतंकी व राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में दोषी पाया और आज आठ आतंकियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही, सभी पर 11-11 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया।
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एक आतंकी के लिए कहा, ऐसे लोग ही करते हैं मदरसों को बदनाम

जयपुर जिला एवं सेशन कोर्ट जहां लश्कर के आतंकियों के खिलाफ सुनाया गया फैसला - फोटो : Amar Ujala
जानकारी के अनुसार वर्ष 2010 अक्टूबर में राजस्थान पुलिस की एसओजी टीम ने तीन पाकिस्तानी और पांच भारतीय नागरिकों को आतंकी साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया था। जिसमें असगर अली, शकर उल्लाह व मोहम्मद इकबाली पाकिस्तानी है। जबकि निशाचंद अली, पवन पुरी, अरुण जैन, काबिल खां और अब्दुल मजीद भारतीय नागरिक है। हालांकि बाद में मामले की जांच एटीएस को सौंप दी गई थी। इनमें से अब्दुल मजीद मदरसे में काम करता था। अदालत ने फैसले में अब्दुल मजीद के लिए कहा कि ऐसे लोग कुरान और मदरसों को बदनाम करते हैं।


गौरतलब है कि चार दिसंबर को आरोपियों के वकील ने आर्थिक हालात का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की थी। वहीं सरकारी वकील ने कहा था​ कि राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
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