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लश्कर-ए-तैयबा के 8 आतंकियों को आजीवन कारावास, सभी पर 11-11 लाख का जुर्माना

Wed, 06 Dec 2017 03:38 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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हाफिज सईद
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मुम्बई हमले के मास्टर माइंड आतंकी हाफिज सईद के संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आठ आतंकियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। साथ ही, सभी पर 11-11  लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
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जयपुर के कोर्ट नंबर 17  के एडीजे पवन गर्ग ने लश्कर-ए-तैयबा के आठ आतंकियों को देश में दंगा फैलाने और अन्य आतंकी व राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में दोषी पाया है। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि ये देश में व्यापक स्तर पर अस्थिरता फैलाना चाहते थे।

कोर्ट ने इन आठों को दोषी मानते हुए विधि विरुद्ध क्रिया-कलाप निवारण अधिनियम की धारा सहित धारा 13, 18, 18 (बी) तथा 20 में सजा सुनाई है और 11-11 लाख रुपए का अर्थदंड लगाया है। कोर्ट ने ये भी माना कि ये देश में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी नेटवर्क को फैलाने की फिराक में थे, जिससे देश में आतंकी हमले भी हो सकें।
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कोर्ट ने नहीं बरती नरमी

गौरतलब है 30 नवंबर को पूरी हुई सजा पर बहस के बाद सजा का ऐलान चार दिसंबर को होना था। लेकिन पक्ष और विपक्ष की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने 6 दिसंबर को सजा सुनाने का निर्णय दिया था। इसके चलते आज सजा सुनाने से पूर्व ही जयपुर के एडीजे कोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।

गौरतलब है कि चार दिसंबर को आरोपियों के वकील ने आर्थिक हालात का हवाला देते हुए कम सजा की मांग की थी। वहीं सरकारी वकील ने कहा था​ कि राष्ट्र की सुरक्षा सर्वोपरि है, इसलिए आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।
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फोन रिकॉर्डिंग के आधार पर हुआ था खुलासा

आतंकवाद - फोटो : FILE PHOTO
गौरतलब है कि  तीन पाकिस्तानी और पांच भारतीय नागरिकों को जयपुर की एडीजे कोर्ट में लश्कर-ए-तैयबा से सबंध रखने और भारत में आतंकी साजिश रचने का दोषी पाया था। 

वर्ष 2010 अक्टूबर में राजस्थान पुलिस की एसओजी टीम ने तीन पाकिस्तानी और पांच भारतीय नागरिकों को आतंकी साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया था। जिसमें असगर अली, शकर उल्लाह व मोहम्मद इकबाली पाकिस्तानी है। जबकि निशाचंद अली, पवन पुरी, अरुण जैन, काबिल खां और अब्दुल मजीद भारतीय नागरिक है। हालांकि बाद में मामले की जांच एटीएस को सौंप दी गई थी। 

​एटीएस की जांच में आरोपियों का सबंध आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से होने के सबूत मिले थे। जांच एजेंसिंयों ने फोन रिकॉर्डिंग के आधार पर इस आतंकी सेल का खुलासा किया था। मामले की सुनवाई सात वर्ष से अधिक समय तक चली। केस में एटीएस ने तीन हजार पन्नों की चार्जशीट भी दाखिल की।
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