जयपुर में महापड़ाव में जुटे किसान
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राजस्थान में किसान आंदोलन को दबाने के लिए सरकारी स्तर पर किए प्रयासों को असर बृहस्पतिवार से शुरू हुए किसानों के महापड़ाव पर साफ तौर पर नजर आया। इन प्रयासों के कारण एक दिन पहले कांग्रेस की ओर से किए गए प्रदर्शन खास छाप नहीं छोड़ पाया।
जयपुर समेत सभी संभाग मुख्यालयों पर किसानों का महापड़ाव शुरू हुआ। पहले दिन भारतीय किसान संघ जोधपुर को छोड़कर अन्य संभाग मुख्यालयों पर किसानों की ज्यादा भीड़ नहीं जुटा पाया। कांग्रेस की ओर से जिला मुख्यालयों पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान भी किसान जुड़ नहीं पाए। देश के दूसरे इलाकों में उग्र किसान आंदोलन को देखते हुए भारतीय किसान संघ के इस आंदोलन में पहले दिन से ही बड़ी संख्या में किसानों के शामिल होने की उम्मीद की जा रही थी।
सूत्रों के अनुसार सीएम वसुंधरा राजे ने इस आंदोलन को दबाने के लिए तमाम मंत्रियों को अपने-अपने प्रभार जिले में रहकर सक्रिय होने के निर्देश दिए गए थे। इन दिनों उग्र किसान आंदोलन के मुख्य केंद्र मध्यप्रदेश से सटे कोटा संभाग में असर को कम करने के लिए कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी को भेजा गया। सैनी वहां दो दिन से कैम्प कर रहे है।
हाड़ौती में लहसुन की बम्पर फसल को देखते हुए समर्थन मूल्य पर उसकी खरीद की प्रमुख मांग को देखते हुए सरकार ने समर्थन मूल्य घोषित कर दिया। उसकी खरीद के केंद्र भी घोषित कर दिए। पतंजलि के माध्यम से लहसुन की खरीद करने का भी प्रचार-प्रसार सरकार ने किया। इससे यहां किसान आंदोलन कमजोर हो गया। इसी तरह केंद्र सरकार के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने भी समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद 30 जून तक करने की घोषणा कर दी।
दूसरी तरफ भारतीय किसान संघ के पदाधिकारियों का दावा है कि महापड़ाव का गुरुवार को पहला दिन था। इस महापड़ाव में जिलेवार किसान लगातार शामिल होते रहेंगे। यह आंदोलन मांगें पूरी होने तक लगातार जारी रहेगा।