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JEE Advanced:अंगुलियां नहीं होने पर हिम्मत नहीं हारी

Sun, 21 May 2017 09:03 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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रचना चौधरी - फोटो : amar ujala
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लहरों से डरकर नैया पार नहीं होती और कोशिश करने वाले की हार नहीं होती...ये बात जेईई मेन्स एग्जाम पास करने वाली रचना चौधरी के लिए बिल्कुल सटीक है। रचना के हाथों में अंगुलियां नहीं होने के बावजूद रविवार को उसने दिल्ली में जेईई एडवांस एग्जाम दिया। उसे पूरा विश्वास है कि वह एग्जाम क्लियर कर लेगी।
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बिहार के दरभंगा जिले के कलसी गांव की रहने वाली रचना चौधरी ने अपनी हथेलियों में आने वाली किस्मत की रेखाओं के भरोसे अपनी जिंदगी नहीं छोड़ी, बल्कि खुद अपनी तकदीर लिखने निकल पड़ी। जहां लोग हाथ—पैर सलामत होने पर भी हिम्मत हार जाते हैं वहीं, दोनों हाथ—पैर की अंगुलियां नहीं होने पर भी रचना इंजीनियर बनने की तमन्ना रखती है। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को आदर्श मानने वाली रचना ने इस बार फिर से जेईई मेन्स एग्जाम को क्वालीफाई किया है और आज दिल्ली में जेईई एडवांस परीक्षा दी। राजस्थान से इस प्रतिभा का परिचय केवल इतना ही है कि यह कोटा में रहकर अपनी परीक्षा की तैयारी में पूरी मेहनत से जुटी रही।  

रचना ने बताया कि उसकी शारीरिक अपंगता को लेकर लोग ताना मारते थे। इससे उसे बुरा लगता था और उसने गांव छोड़कर शहर में पढ़ाई करने की ठानी, ताकि वो भी दुनिया में नाम कर सके। उसका कहना है कि अब वह कुछ बनकर ही वापस गांव जाएगी।
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गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली रचना बताती है कि जेईई मेन्स एग्जाम से पहले तैयारी के दौरान उसे टायफाइड हो गया था। बायें फेफड़े में पानी भरने से उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। खुद पर पूरा विश्वास था इसलिए डॉक्टरों से परीक्षा देने की अनुमति मांगी और इस बार फिर से जेईई मेन्स को क्लीयर किया। दिल्ली के सरकारी अस्पताल से कुछ दिनों पहले ही उसे छुट्टी मिली है। उसने कोटा में एलन इंस्टीट्यूट के नवीन माहेश्वरी का भी शुक्रिया किया, जिन्होंने उसकी हालत देखकर उसे यहां आधी फीस में पढ़ने का अवसर प्रदान किया।
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मां चला रही पूरा परिवार

डेमो इमेज
रचना का पूरा परिवार उसकी मां माधूरी देवी चला रही है। पिता संजय पिछले छह वर्षों से बीमार है और घर पर ही रहते हैं। ऐसे में घर चलाने के लिए मां को नौकरी करनी पड़ती है। मां माधुरी नोएडा में एक प्राइवेट कंपनी में हेल्पर का काम करती है। सोलह वर्षीय छोटा भाई विष्णु सेरीब्रल पाल्सी से पीड़ित है इसके बावजूद भी दसवीं कक्षा में पढ़ता है। एक अन्य छोटा भाई राज दस साल का है। नोएडा में किराये के कमरे में यह पूरा परिवार अपनी जिंदगी बसर कर रहा है। रचना के पढ़ने की ललक देखकर मां ही उसे नोएडा लेकर आई थी। यहां तक कि मां ने बीमारी के दौरान नौकरी छोड़कर उसकी पूरी देखरेख की।

रचना ने बताया कि जब नोएडा में वह स्कूल में पढ़ने जाती थी तो साथियों से कोटा के बारे में सुना। दसवीं के बाद मां से कोटा जाकर पढ़ाई करने की कही, लेकिन घर के हालात खराब होने से ऐसा नहीं हो सका। इसके बाद बारहवीं पास करके इंजीनियर बनने की पढ़ाई करनी थी तो इधर—उधर से कुछ रुपए उधार लेकर मां उसे कोटा लेकर आ गई। यहां जब कोचिंग इंस्टीट्यूट के निदेशक सर से बात की तो उन्होंने पूरी मदद करने का आश्वासन दिया। तब जाकर उसकी जेईई मेन्स एग्जाम की तैयारी शुरू हुई।

रचना ने बताया कि परिस्थितियां विपरित होने के कारण गत वर्ष जेईई-मेन्स के स्कोर के आधार पर होने वाली काउंसलिंग में शामिल नहीं हुई। इस साल जेईई-मेन्स एग्जाम में पीडब्ल्यूडी(पर्सन विद डिसएबिलिटी) वर्ग में 2072 रैंक मिली।
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