लहरों से डरकर नैया पार नहीं होती और कोशिश करने वाले की हार नहीं होती...ये बात जेईई मेन्स एग्जाम पास करने वाली रचना चौधरी के लिए बिल्कुल सटीक है। रचना के हाथों में अंगुलियां नहीं होने के बावजूद रविवार को उसने दिल्ली में जेईई एडवांस एग्जाम दिया। उसे पूरा विश्वास है कि वह एग्जाम क्लियर कर लेगी।
बिहार के दरभंगा जिले के कलसी गांव की रहने वाली रचना चौधरी ने अपनी हथेलियों में आने वाली किस्मत की रेखाओं के भरोसे अपनी जिंदगी नहीं छोड़ी, बल्कि खुद अपनी तकदीर लिखने निकल पड़ी। जहां लोग हाथ—पैर सलामत होने पर भी हिम्मत हार जाते हैं वहीं, दोनों हाथ—पैर की अंगुलियां नहीं होने पर भी रचना इंजीनियर बनने की तमन्ना रखती है। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को आदर्श मानने वाली रचना ने इस बार फिर से जेईई मेन्स एग्जाम को क्वालीफाई किया है और आज दिल्ली में जेईई एडवांस परीक्षा दी। राजस्थान से इस प्रतिभा का परिचय केवल इतना ही है कि यह कोटा में रहकर अपनी परीक्षा की तैयारी में पूरी मेहनत से जुटी रही।
रचना ने बताया कि उसकी शारीरिक अपंगता को लेकर लोग ताना मारते थे। इससे उसे बुरा लगता था और उसने गांव छोड़कर शहर में पढ़ाई करने की ठानी, ताकि वो भी दुनिया में नाम कर सके। उसका कहना है कि अब वह कुछ बनकर ही वापस गांव जाएगी।
गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली रचना बताती है कि जेईई मेन्स एग्जाम से पहले तैयारी के दौरान उसे टायफाइड हो गया था। बायें फेफड़े में पानी भरने से उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। खुद पर पूरा विश्वास था इसलिए डॉक्टरों से परीक्षा देने की अनुमति मांगी और इस बार फिर से जेईई मेन्स को क्लीयर किया। दिल्ली के सरकारी अस्पताल से कुछ दिनों पहले ही उसे छुट्टी मिली है। उसने कोटा में एलन इंस्टीट्यूट के नवीन माहेश्वरी का भी शुक्रिया किया, जिन्होंने उसकी हालत देखकर उसे यहां आधी फीस में पढ़ने का अवसर प्रदान किया।