सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में स्थित जन्नती दरवाजा
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अजमेर के सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में एक दरवाजा ऐसा भी है जिसमें से होकर गुजरने से जन्नत नसीब होती है। यह दरवाजा साल में केवल चार बार ही खोला जाता है। इस दरवाजे से गुजरने के लिए अकीदतमंद घंटों तक लाईन में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं।
ख्वाजा साहब के खिदमततगार खादिम कुतुबुद्दीन सखी बताते हैं कि ख्वाजा गरीब नवाज इबादत के लिए इसी रास्ते को काम में लेते थे। ख्वाजा साहब को अल्लाह ने यह कहा कि जो लोग मक्का मदीना की जियारत नहीं कर पाते, वह यदि इस दरवाजे से गुजर जाएंगे तो उनकी सभी दुआएं और मन्नतें कुबूल होगी।
सखी ने बताया कि अल्लाह के इस संदेशे को ख्वाजा साहब ने अपने खिदमतगारों के जरिए अकीदतमंदों तक पहुंचाया। इसके बाद से दरगाह के जन्नती दरवाजे से होकर पवित्र मजार तक जाने के लिए जायरीन उत्सुक रहते हैं।