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इस दरवाजे से गुजरने वाले को नसीब होती है जन्नत

Sat, 25 Mar 2017 02:49 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में स्थित जन्नती दरवाजा - फोटो : amar ujala
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अजमेर के सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में एक दरवाजा ऐसा भी है जिसमें से होकर गुजरने से जन्नत नसीब होती है। यह दरवाजा साल में केवल चार बार ही खोला जाता है। इस दरवाजे से गुजरने के लिए अकीदतमंद घंटों तक लाईन में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। 
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ख्वाजा साहब के खिदमततगार खादिम कुतुबुद्दीन सखी बताते हैं कि ख्वाजा गरीब नवाज इबादत के लिए इसी रास्ते को काम में लेते थे। ख्वाजा साहब को अल्लाह ने यह कहा कि जो लोग मक्का मदीना की जियारत नहीं कर पाते, वह यदि इस दरवाजे से गुजर जाएंगे तो उनकी सभी दुआएं और मन्नतें कुबूल होगी।

सखी ने बताया कि अल्लाह के इस संदेशे को ख्वाजा साहब ने अपने खिदमतगारों के जरिए अकीदतमंदों तक पहुंचाया। इसके बाद से  दरगाह के जन्नती दरवाजे से होकर पवित्र मजार तक जाने के लिए जायरीन उत्सुक रहते हैं। 
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साल में चार बार खुलता है जन्नत का दरवाजा

दरवाजे पर खड़े होकर मन्नतें मांगते जायरीन - फोटो : amar ujala

खादिम कुतुबुद्दीन सखी ने बताया कि जन्नती दरवाजा खुलने का और बंद होने का भी एक निश्चित समय है। ख्वाजा साहब के उर्स में रजब माह की चांद रात से 6 रजब तक 7 दिन तक खुला रहेगा। इस बार चांद रात 28 मार्च की है।

इसके बाद रमजान माह की ईद को सुबह पांच बजे से लेकर डेढ़ बजे तक खोला जाता है। ख्वाजा साहब के गुरू हजरत उस्मान हारूनी के उर्स के मौके पर भी सुबह पांच बजे खुलकर डेढ़ बजे बंद किया जाता है। इसी तरह बकरा ईद पर भी दरवाजा खोला जाता है। मन्नत पूरी होने पर मन्नत का धागा खोलने और शुक्राना अदा करने भी अकीदतमंद यहां आते हैं।
 
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