राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर मैटल्स के 19 साल पहले हटाए गए कर्मचारी को पुन: सेवा में लेने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता को सेवा में मानते हुए पिछला वेतन और समस्त परिलाभ तीन माह में अदा करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायाधीश एसपी शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश प्रेमचंद गुप्ता की ओर से 1999 में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता को बडे हल्के अंदाज में सेवा से निकालने का आदेश जारी किया गया है। यह न केवल गंभीर मामला है, बल्कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के भी खिलाफ है। याचिका में कहा गया कि उसे जयपुर मैटल्स एंड इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड ने याचिकाकर्ता को 10 नवंबर 1998 को बिना नोटिस और बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए मनमाने तरीके से सेवा से हटा दिया। ऐसे में उसे पुन: सेवा में रखने के आदेश देते हुए पिछला बकाया दिलाया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता को सेवा में रखते हुए पिछला वेतन सहित सभी परिलाभ अदा करने के आदेश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान जयपुर मेटल्स की ओर से पैरवी के लिए कोई अधिवक्ता पेश नहीं हुआ। इस पर अदालत ने पूर्व में पैरवी करने वाले अधिवक्ता मनोज कुमार शर्मा को बुलाया। उन्होंने अदालत को बताया कि वे मामले की फाइल लौटा चुके हैं। इस पर अदालत ने समान प्रकरण में जयपुर मैटल्स की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता रवि भोजक को बुलाया। उन्होंने भी अदालत को बताया कि वे अब जयपुर मैटल्स के लिए पैरवी नहीं कर रहे हैं। इस पर अदालत ने एक पक्षीय सुनवाई करते हुए आदेश जारी किए हैं।