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जयपुर बम ब्लास्ट: नहीं हारी हिम्मत, हादसे से उबरकर इन्होंने बनाया भविष्य

Sat, 13 May 2017 07:10 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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राजस्थान यूनिवर्सिटी - फोटो : अमर उजाला
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13 मई 2008 को जयपुर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के बाद पीड़ित परिवार हिम्मत हार चुके थे। सभी के सपने मानो टूट गए हो। खास तौर पर तब जब सवाल बच्चों की पढ़ाई का आया। ऐसे में राजस्थान विवि के एक कदम ने उस समय उन परिवारों को राहत दी। इस बम ब्लास्ट में पीड़ितों व उनके आश्रितों को विवि में न्यूनतम योग्यता के आधार प्रवेश देने की पहल की गई।
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कई परिवारों की तरह मोहसीन अहमद और शहजाद अहमद के सामने भी एक सवाल था कि अब क्या होगा। उनके इस सवाल का जवाब भी विवि की यही पहल बनकर आई। दोनों को विवि  में प्रवेश मिला। दोनों ने मन लगाकर पढ़ाई की। नियति की क्रूरता से पार पाने की कोशिश की। पहले राजस्थान विवि से बीए पूरा किया और फिर विधि महाविद्यालय में प्रवेश ले लिया। वहां अच्छे अंकों से डिग्री पूरी की। अब दोनों ही राजस्थान हाईकोर्ट में अधिवक्ता के रूप में काम करने रहे हैं। ये तो बस इन दो की कहानी है, ऐसे कई और भी उदाहरण हैं। इनमें प्रियंका शर्मा और नेहा यादव का भी नाम शामिल हैं, जिन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की।
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17 विद्यार्थियों को अब तक मिला प्रवेश

मोहसीन - फोटो : अमर उजाला
दरअसल, इस घटना के बाद विवि के जनसम्पर्क अधिकारी भूपेंद्र सिंह शेखावत ने अपनी तरफ से एक नया प्रस्ताव रखा। राजस्थान विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष यह प्रस्ताव रखा गया कि इस वीभत्स हादसे के पीड़ितों की सहायता के लिए विश्वविद्यालय को उच्च शिक्षा प्रदान करने के लिए आगे आना चाहिए। इन पीड़ितों व इनके आश्रितों को न्यूनतम योग्यता के आधार पर प्रवेश देना चाहिए। इन्हें विश्वविद्यालय में अध्ययन पूरा होने तक किसी तरह की शुल्क नहीं देना पड़े। इस प्रस्ताव को विवि ने स्वीकार किया।

इस पहल को आधार बनाकर विश्वविद्यालय में इन पीड़ितों की सहायता के लिए एक नया ऑर्डिनेंस 81 डी बनाया गया जिससे इन पीड़ितों को विवि में अध्ययन करने का मौका मिल सका। इस पहल से अब तक जयपुर बम ब्लास्ट के 17 पीड़ितों को विवि के विभिन्न कॉलेजों,पी.जी. विभागों में न्यूनतम योग्यता के आधार पर प्राथमिकता से निशुल्क प्रवेश दिया गया। इनमें से अधिकांश अपना अध्ययन समाप्त कर अनेक सरकारी एंव निजी संस्थानों में विभिन्न पदों पर रोजगार प्राप्त कर चुके हैं|
 
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