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GRAM में बताए जाएंगे मधुमक्खी पालन से कमाई के गुर

Tue, 16 May 2017 05:07 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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मधुमक्खी पालन - फोटो : Amar Ujala
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मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में कोटा संभाग मजबूती से उभर रहा है। शुरुआती दौर में यहां हर साल करीब 3.5 करोड़ रुपए के शहद का उत्पादन हो रहा है। इस उपलब्धि की जानकारी यहां 24 मई से 26 मई तक आयोजित होने वाले ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) के दौरान किसानों को दी जाएगी। 
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एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट की प्रिंसिपल सेकेट्री नीलकमल दरबारी ने बताया कि वर्तमान में कोटा में मधुमक्खी पालन शुरूआती दौर में है, लेकिन इसके बाद भी यहां प्रतिवर्ष 3 से 3.5 करोड़ रुपए के शहद का उत्पादन किया जा रहा है। अनुकूल जलवायु के चलते कोटा संभाग में लगभग 375 मीट्रिक टन शहद का प्रतिवर्ष उत्पादन हो रहा है। 

उन्होंने बताया कि कोटा में वर्ष 2003-2004 में मधुमक्खी पालन की शुरूआत हुई थी। वर्तमान में इस क्षेत्र में 14,000 मधुमक्खी कॉलोनीज यानि बॉक्स हैं। हरेक में 25 से 30 किलो शहद का उत्पादन होता है और इस प्रक्रिया में 400 से 450 किसान शामिल होते हैं। गत एक दशक से प्रत्येक वर्ष 1,500 से 2,000 मधुमक्खी के बॉक्स में वृद्धि हो रही है।
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मुधमक्खी पालन पर सरकार देती है सब्सिड़ी

मुधमक्खी पालन पर सरकार देती है सब्सिड़ी - फोटो : Amar Ujala
दरबारी ने बताया कि मुधुमक्खी पालन पर सरकार की ओर से सब्सिड़ी भी दी जाती है। अधिकतम  50 बॉक्स , बॉक्स की कीमत (प्रति बॉक्स अथवा मधुमक्खी कॉलोनी की लागत 1,600 रुपए) पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी दी जा रही है। 

उन्होंने बताया कि कृषि आजीविका में विविधता लाते हुए कृषि विश्वविद्यालय, कोटा द्वारा तीन माह पूर्व मधुमक्खी पालन की परियोजना आरम्भ की गई थी। संभाग के अन्य जिलों को मधुमक्खी पालन उद्योग के लिए प्रेरित करना इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है।
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ये तरीके अपनाए तो मिली ज्यादा सफलता

हनी प्रोसेसिंग प्लांट - फोटो : Amar Ujala
कृषि विश्वविद्यालय द्वारा पंजाब से हनी प्रोसेसिंग प्लांट खरीदकर यहां लगाया गया है। वर्तमान में इस प्रोसेसिंग प्लांट में प्रति दिन 200 किलोग्राम कच्चे शहद को प्रोसेस किया जाता है एवं 3 रुपए प्रति किलो की मामूली शुल्क पर राज्य के लगभग 40 मधुमक्खी पालकों को यह सुविधा प्रदान की जाती है। 

इस परियोजना द्वारा रानी मधुमक्खी का कृत्रिम प्रजनन भी किया जाता है। इसके तहत प्रति कॉलोनी 12 से 16 रानी मधुमक्खियों की उत्पत्ति होती है जबकि पारम्परिक प्रक्रिया से प्रति कॉलोनी मात्र एक रानी मधुमक्खी उत्पन्न होती है। विश्वविद्यालय में अनुसंधान एवं वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए 145 मधुमक्खी कॉलोनियां हैं, जिनकी लगभग 20 प्रशिक्षित मधुमक्खी पालकों द्वारा देखभाल की जा रही है। प्रत्येक कॉलोनी से प्रतिवर्ष 20 से 30 किलोग्राम शहद का उत्पादन होता है। 
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