मवेशियों की खरीद-फरोख्त के संबंध में केंद्र सरकार के नए नोटिफिकेशन पर मद्रास हाईकोर्ट द्वारा चार हफ्ते की रोक के आदेश के ठीक एक दिन बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने भी एक बड़ा फैसला सुनाया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने बहुचर्चित हिंगोनिया गौशाला मामले में अपने फैसले में कहा है कि केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करवाने के लिए राज्य सरकार प्रयास करे। साथ ही गोकशी करने वालों को आजीवन कारावास का प्रावधान कानून में शामिल करवाए।
राजस्थान हाईकोर्ट ने बहुचर्चित हिंगोनिया गौशाला मामले में 7 साल बाद अपना फैसला सुनाया है। खास बात यह है कि जागो जनता सोसायटी की ओर से इस संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करने वाले मुख्य न्यायाधीश महेश चंद शर्मा ने अपने रिटायरमेंट के दिन बुधवार को अपना आखिरी फैसला सुनाया। फैसले में कहा गया है कि केंद्र से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करवाने के लिए केंद्र सरकार के सामने पक्ष रखने के लिए मुख्य सचिव और महाधिवक्ता कार्यवाही करे। हाईकोर्ट ने इस मामले को लेकर कमेटी भी बनाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने नेपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नए संविधान में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जा चुका है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने फैसले में कहा है कि हिंगोनिया गौशाला में भ्रष्टाचार की जांच एसीबी करे। कोर्ट ने एडीजे को हर तीन महीने में गोशाला को लेकर रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यूडीएच सचिव और निगम आयुक्त सहित सम्बंधित अफसरों को महीने में एक बार गौशाला का दौरा करने के निर्देश दिए।
कोर्ट ने इस मामले में वन विभाग को गौशाला में हर साल 5 हजार पौधे लगाने को कहा है। साथ ही, अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूर्व में दिए गए आदेशों की अनुपालना यथावत ही की जाए। वर्तमान में राजस्थान में राजस्थान गौवंशीय पशु (वध का प्रतिषेध एवं निर्यात का विनियमन) अधिनियम के तहत गौहत्या पर तीन वर्ष के कारावास की सजा का प्रावधान है।