राजस्थान हाईकोर्ट ने भरतपुर के सेवर थाना इलाके में हुई हत्या के मामले को आत्महत्या का रूप देने पर एसओजी के आईजी दिनेश एमएन को 18 अगस्त को पेश होने के आदेश दिए हैं। अदालत ने आईजी से पूछा है कि लचर जांच करने वाले एसओजी के जांच अधिकारी पर क्या कार्रवाई की जाए।
न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश मृतक की नाबालिग पुत्री की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता से कुछ लोगों ने छेड़छाड़ करने के बाद उसके पिता तेजपाल की अक्टूबर 2014 में हत्या कर दी थी। इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को पंखे से लटका दिया। याचिका में कहा गया कि पंखे पर लटके शव के दोनों पांव घुटने से मुड़कर फर्श पर टिके हुए हैं। ऐसे में यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या का मामला है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केवल पोक्सो अधिनियम में आरोप पत्र पेश किया है। इसलिए मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने गत दिनों प्रकरण की जांच एसओजी को सौंपी थी। एसओजी की ओर से अदालत में तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश कर घटना को आत्महत्या का ही बताया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए एसओजी के आईजी को पेश होने के आदेश दिए हैं।