राजस्थान हाईकोर्ट ने तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती 2013 में उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद नियुक्त हुए याचिकाकर्ताओं को पूर्व में चयनित अन्य अध्यापकों के समान वरिष्ठता व वेतन स्थायीकरण सहित अन्य परिलाभ देने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश सावलदान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में अधिवक्ता रामप्रताप सैनी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता अक्टूबर 2017 में पुनः परिणाम आने के बाद नियुक्त हुए। आरटेट में कम अंक होने के चलते पूर्व में उन्हें नियुक्ति नहीं दी गई थी। उच्चतम न्यायालय के दिशा निर्देश मिलने के बाद उन्हें अध्यापक पद पर नियुक्त किया गया। राज्य सरकार की ओर से याचिकाकर्ता को इसी भर्ती में पूर्व में चयनित हुए अभ्यर्थियों के मुकाबले कम वेतन और सेवा संबंधी परिलाभ दिए जा रहे हैं। जिसे चुनौती देते हुए कहा गया कि एक ही भर्ती में अभ्यर्थियों को अलग अलग वेतन और सेवा परिलाभ देना गलत है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं के वेतन परिलाभों की गणना भी पूर्व में चयनित अभ्यर्थियों की तिथि से ही की जाए।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने पूर्व में चयनित अभ्यर्थियों के समान ही याचिकाकर्ताओं को परिलाभ देने के आदेश दिए हैं।