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नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता बनेगी मां, कोर्ट ने अबॉर्शन की नहीं दी मंजूरी

Thu, 20 Jul 2017 12:17 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : demo pic
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दुष्कर्म की शिकार छह माह की गर्भवती नाबालिग को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अबॉर्शन की मंजूरी नहीं मिली है। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस विजय विश्नोई की अदालत ने पीड़िता की उम्र व शारीरिक स्थित को देखते हुए मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी थी। पीड़िता नाबालिग होने के साथ छह माह की गर्भवती है।
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मेडिकल बोर्ड ने पूरी जांच करने के बाद कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई। इसके आधार पर सरकारी अधिवक्ता शिवकुमार व्यास ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता की शारीरिक स्थित अच्छी नहीं है और वो एनिमिक है। ऐसे में अबॉर्शन करवाना उसके लिए जानलेवा हो सकता है।


इससे पहले पीड़िता ने कोर्ट से गर्भपात गिराने की गुहार की थी जिसके बाद कोर्ट ने गर्भपात की स्थिती जानने के लिए मेडिकल बोर्ड से जांच कराए जाने के बाद रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अबॉर्शन की अनुमति नहीं दी।
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पीड़िता की सहायता के लिए दिए ये तर्क, सुनवाई 24 को

- फोटो : file photo
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता गोकुलेश बोहरा ने कोर्ट से गुहार की है कि पीड़िता को प्रतिकर में सहायता राशि दिलाई जाए इस पर हाईकोर्ट ने आगामी 24 जुलाई को सुनवाई की तारीख  तय की है।

गौरतलब है कि कल चंडीगढ़ की भी एक अदालत में ठीक ऐसे ही मामले को लेकर सुनवाई की गई जिसमें एक 10 साल की दुष्कर्म पीड़ित बच्ची को अबॉर्शन नहीं कराने के आदेश दिए। 10 साल की दुष्कर्म पीड़िता के गर्भ में 6 माह का बच्चा पल रहा है।

यहां भी डॉक्टरों ने बच्ची को मेडिकल बोर्ड द्वारा रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद ही ये फैसला सुनाया है। यहां डॉक्टरों ने कोर्ट को बताया था कि यदि बच्ची का गर्भपात कराया जाता है तो उसकी जान को खतरा हो सकता है। 
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