दुष्कर्म की शिकार छह माह की गर्भवती नाबालिग को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर अबॉर्शन की मंजूरी नहीं मिली है। राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस विजय विश्नोई की अदालत ने पीड़िता की उम्र व शारीरिक स्थित को देखते हुए मेडिकल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी थी। पीड़िता नाबालिग होने के साथ छह माह की गर्भवती है।
मेडिकल बोर्ड ने पूरी जांच करने के बाद कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई। इसके आधार पर सरकारी अधिवक्ता शिवकुमार व्यास ने कोर्ट को बताया कि पीड़िता की शारीरिक स्थित अच्छी नहीं है और वो एनिमिक है। ऐसे में अबॉर्शन करवाना उसके लिए जानलेवा हो सकता है।
इससे पहले पीड़िता ने कोर्ट से गर्भपात गिराने की गुहार की थी जिसके बाद कोर्ट ने गर्भपात की स्थिती जानने के लिए मेडिकल बोर्ड से जांच कराए जाने के बाद रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद अबॉर्शन की अनुमति नहीं दी।