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जेडीए, विकास प्राधिकरण नहीं विनाश प्राधिकरण है - हाईकोर्ट

Tue, 11 Apr 2017 12:12 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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कोर्ट की जेडीए पर टिप्पणी।
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राजस्थान हाईकोर्ट ने मंगलवार को जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) को लेकर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने अतिक्रमण से जुड़े एक मामले में जेडीए पर मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह विकास प्राधिकरण नहीं, विनाश प्राधिकरण है।
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न्यायधीश के. एस. झवेरी की खण्डपीठ ने खातीपुरा सेक्टर रोड नं. 13 और 14 से 45 दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। ओमप्रकाश ओझा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खण्डपीठ ने यह आदेश दिए और साथ जयपुर विकास प्राधिकरण पर सख्त टिप्पणी भी की। जेडीए की अतिक्रमणों को नियमित करने की मंशा को देखते हुए ओझा ने वर्ष 2006 में ही हाईकोर्ट में ही जनहित याचिका लगा दी थी। इसी पर हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है।

मामले के तहत खातीपुरा सेक्टर रोड नं. 13 और 14, जो गोपालन नगर सिंह भूमि और जसवंत नगर से जुड़ी हुई है। इस 80 फीट की रोड पर 73 अतिक्रमणों को चिह्नित किया गया है। जेडीए की 21-9-2006 में हुई बीपीसी की बैठक में इन अतिक्रमणों को नियमित करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। इन अतिक्रमणों को नियमित करने के लिए 80 फीट रोड को 40 फिट करने का भी प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
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जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए वर्ष 2009 में हाईकोर्ट ने बीपीसी के प्रस्तावों को स्टे कर अतिक्रमणों को हटाने के निर्देश जारी कर दिए थे। लेकिन इस पर जेडीए ने कोई कार्यवाही नहीं की। इसके बाद पिछले साल 16 मार्च को जेडीए ने फिर इन अतिक्रमणों को नियमित करने का निर्णय कर लिया।

हाईकोर्ट में मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान जेडीए से मामले की प्रगति रिपोर्ट मांगी, तो जेडीए ने फिर अगली तारीख की मांग की। इस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए सख्त टिप्पणी की।
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