विधानसभा में बजट चर्चा के बाद विधायकों से बातचीत करते अशोक गहलोत.
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने चुनावी साल में हिंदू कार्ड खेला है। उन लोगों को करारा जवाब दिया है, जो उन पर एक समुदाय विशेष का हितैषी होने का आरोप लगाते रहे हैं। उन्होंने नए संभाग और नए जिलों की घोषणा करने के साथ ही उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर राजस्थान के प्रमुख हिंदू मंदिरों को विकसित करने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि खाटूश्याम जी, सालासर बालाजी, पुष्कर का मंदिर और जयपुर के आराध्य देव गोविंद देवजी के मंदिर को महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जाएगा।
विधानसभा में बजट बहस का जवाब देते हुए कई घोषणाएं की। उन्होंने जो प्रमुख गोषणाएं की हैं, उनमें जयपुर के गोविन्द देवजी के मंदिर का विकास महाकाल लोक की तर्ज पर करने की घोषणा की है। इसके पहले चरण पर 100 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी तरह तीर्थराज पुष्कर के समग्र विकास के लिए पुष्कर विकास प्राधिकरण के गठन की घोषणा की है। इसके अलावा सांवलिया सेठ-चित्तौड़गढ़ में जलझूलनी एकादशी मेले को भी 50 प्रतिशत बस किराया छूट दी जाएगी। बेणेश्वर धाम-डूंगरपुर के समग्र विकास की कार्ययोजना तैयार करते अगले साल 100 करोड़ रुपये के विकास कार्य प्रस्तावित है। इसी तरह खाटूश्यामजी सीकर में श्रद्धालुओं के मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 32 करोड़ रुपये की लागत से डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा।
593 मंदिरों में रंगरोगन, पुजारियों का मानदेय बढ़ाया
गहलोत ने कहा कि देवस्थान विभाग के अधीन 593 मंदिरों में पोशाक, रंग-रोगन एवं मरम्मत आदि कार्य करवाए जाएंगे। राजकीय प्रत्यक्ष प्रभार मंदिरों के अंशकालीन पुजारियों के मानदेय में वृद्धि कर एक समान पांच हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। ।
उदयपुर के चिंतन शिविर से लिया सबक
कांग्रेस के उदयपुर में हुए चिंतन शिविर में जो मुद्दे सामने आए थे, उनमें मुद्दा उठा था कि पार्टी हिंदुओं से दूर होती जा रही है। हिंदुओं के बीच विश्वास हासिल करने के लिए अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री गहलोत की घोषणाओं पर इस संकल्प का असर दिखाई दे रहा है। यह घोषणाएं 2023 के विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।