देश के सबसे चर्चित केसों में से एक रहे जर्मन युवती रेप केस मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी बिट्टी मोहंती को सर्शत जमानत दे दी है। कोर्ट ने कहा कि बिट्टी को अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा।
गौरतलब है कि इस मामले के शुरू से ही चर्चाओं में रहने के दो बड़े कारण रहे हैं। पहला, बिट्टी मोहंती उड़ीसा के पूर्व डीजीपी बी.बी. मोहंती का बेटा है। दूसरा, ये देश का ऐसा पहला केस था, जिसकी ट्रायल प्रांरभ होने के नौ दिन बाद ही सजा का ऐलान हो गया था। वर्ष 2006 में अलवर में बिट्टी मोहंती और उनकी जर्मन दोस्त अलवर घूमने आए थे। जहां बिट्टी पर अपनी दोस्त के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा। उसके बाद उन्हें इस मामले में सात वर्ष की सजा हुई। इसलिए चर्चाओं में भी रहा केस...
— बिट्टी पर 20 मार्च 2006 को अलवर के एक होटल में जर्मन महिला दोस्त के साथ रेप करने का आरोप।
— 21 मार्च को अलवर रेलवे स्टेशन से बिट्टी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। जहां से 15 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया।
— 27 मार्च को पीड़िता ने उसे धमकाने को लेकर एआईआर दर्ज कराई।
— जबकि केस का ट्रायल एक अप्रेल 2006 से प्रारंभ हुआ।
— जयपुर की फास्ट ट्रेक कोर्ट ने नौ दिन बाद ही बिट्ट को दोषी मानते हुए सात साल की कैद व दस हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।
— नवंबर 2006 में बिट्टी मोहंती को पैरोल मिला। उसके बाद वह फरार हो गया।
— पैरोल उसके पिता बीबी मोहंती की जमानत पर मिली थी। इसलिए बीबी मोहंती के खिलाफ अरेस्ट वारंट जारी हुआ।
— उड़ीसा सरकार ने बीबी मोहंती को निलंबित कर दिया। फिर पूर्व डीजीपी ने जयपुर कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
— बीबी मोहंती ने कोर्ट में कहा था कि उन्हें शक है कि उनका बेटा मर चुका है। बीबी मोहंती की मंशा थी कि पुलिस उनके बेटे को ढूंढना बंद कर दे।
— वर्ष 2013 में बिट्टी को केरला से गिरफ्तार किया गया।
— चौंकाने वाली बात यह थी कि वह कई वर्षो से फर्जी पहचान के साथ स्टेट बैंक आॅफ त्रावणकोर में पीओ के पद पर काम कर रहा था।