आपने संजय दत्त अभिनीत फिल्म 'वास्तव' तो देखी होगी... फिल्म में एक भोले भाले आदमी से गैंगस्टर बनकर अपराध के गलत रास्ते पर चलने वाले रघु का किरदार भी याद होगा। पांच राज्यों में आतंक का पर्याय बन चुके आनंदपाल की कहानी भी इसी तरह की थ्रिलर फिल्म सी है। बीएड की डिग्री, फिर सीमेंट की दुकान और फिर प्रधान का चुनाव... रास्ते बदलते गए और उसके साथ आनंदपाल भी। कुछ ही सालों में आनंदपाल कुख्यात गैंगस्टर बन गया। इस कहानी में सीन दर सीन नए किरदार आए और कहानी में बदलाव होता गया।
फिल्म वास्तव में जिस तरह रघु की मां चाहती थी कि वह सरेंडर कर दे, उसी तरह आनंदपाल की मां का कहना भी था कि वह या तो सरेंडर कर दे या पुलिस उसे पकड़ ले। किसी एक की गलती की सजा सभी को देना गलत है। आनंदपाल की मां निर्मल कंवर समेत उनके पूरे परिवार ने उसे आखिरी बार दूर से उस समय देखा था जब आनंदपाल के पिता हुकुम सिंह का अंतिम संस्कार हो रहा था। इसके बाद वह अपराध जगत में इस तरह लिप्त हो गया कि परिवार से मिलना भी नसीब नहीं हो सका।
हांलाकि माना जाता है कि आनंदपाल भले ही अपने घर से दूर हो लेकिन परिवार जनों की पल पल की खबर और कुशलक्षेम उसे मिलती रहती थी। उसके नेटवर्क और गैंग में शामिल लोग उसके घर के आस पास पूरा ध्यान रखते थे।
मां चाहती थी कि सरेंडर कर दे
गैंगस्टर आनंदपाल
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उसकी मां निर्मल कंवर ने कहा कि वह पहले सीधा साधा था। उसने बीएड की और उसके बाद सीमेंट की दुकान शुरू की। उसके बाद लाडनूं में प्रधान का चुनाव लड़ा। इस दौरान ही लड़ाई और आपसी रंजिशों का दौर शुरू हो गया। उस पर हत्या का मुकदमा भी लगा।
निर्मल कंवर ने पहले कहा भी था कि आनंदपाल का रास्ता सही नहीं है। वे खुद चाहती थी कि आनंदपाल खुद सरेंडर कर दे। उसका रास्ता सही नहीं है। अगर वो सरेंडर कर देगा तो कोई रास्ता निकल सकेगा।
उन्होंने बताया कि एक वक्त था जब घर में खेती भी थी और मवेशी भी। मजदूर जमीन पर काम करते थे, खेती करते थे, लेकिन आनंदपाल के अपराधों में लिप्त होने के बाद पुलिस की दबिश कभी भी हो जाती। ऐसे में लोगों के साथ ही मजदूरों ने भी साथ छोड़ना शुरू कर दिया।
अब बस इंतजार बाकी....
Gangster Anandpal
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आनंदपाल की मां का कहना था कि आनंदपाल के साथ ही उसके दो छोटे भाइयों को शुरुआत में बेवजह अपराध की दुनिया में धकेल दिया गया। कई गलत मामले दर्ज करवा दिए गए, जिनसे उनका कोई लेना देना नहीं था।
लाडनूं में आनंदपाल की मां निर्मल कंवर के साथ उसकी दादी सोहन कंवर भी रहती है। उनका कहना है कि अब सब खत्म हो गया है। रोते हुए उन्होंने कहा कि बस मौत का इंतजार है, जब सब खत्म हो ही चुका है, बचा कुछ नहीं है। आनंदपाल की दादी जहां लाडनूं में रहती हैं तो उसकी पत्नी राजकंवर और बच्चे जयपुर में रहते हैं।