बीकानेर के कोलायत व गजनेर में हुए जमीन घोटाले में प्रर्वतन निदेशालय ने गुरुवार को मनी लॉउड्रिंग एक्ट के तहत चार आरोपियों की 1.18 करोड़ की चल व अचल संपत्ति को कुर्क कर दिया। इस जमीन घोटाले की आंच सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा तक भी पहुंच रही है।
इस केस में प्रवर्तन निदेशालय वाड्रा से सबंध रखने वाली कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी प्राईवेट लिमिटेड को नोटिस जारी कर चुका है। गौरतलब है कि सरकार ने कोलायत व गजनेर में 1989 में 34 गांवों की करीब 1422 बीघा जमीन का अधिग्रहण किया था।
इसी जमीन को कुछ राजस्व कर्मचारियों ने फर्जीवाड़ा कर कुछ लोगों के नाम अलॉट कर दी। इस घोटाले में पुलिस ने मुख्य आरोपी जयप्रकाश बगारवा सहित सरकारी कर्मचारी उमा चारन शर्मा, तत्कालीन पटवारी फकीर मोहम्मद व महावीर स्वाम को बनाया था। इन आरोप है कि इन्होंने फर्जी अलॉटमेंट पत्र बनाकर जमीन अलॉट कर दी।
वर्ष 2014 में हुई एफआईआर
जमीन घोटाला में स्थानीय पुलिस ने जांंच के आधार पर अगस्त—सितंबर 2014 में 18 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। इसके बाद वर्ष 2015 अगस्त में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई। जबकि सितंबर 2015 में मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय ने भी प्रारंभ की।
ऐसे आया रॉबर्ट वाड्रा का नाम
दरअसल आरोपियों ने जिन लोगों के नाम जमीन अलॉट की थी। उन्होंने वर्ष 2009—19 में इसमें से करीब 1372 बीघा जमीन एक व्यक्ति के साथ रॉबर्ट वाड्रा से सबंध रखने वाली कंपनी स्काई लाइट हॉस्पिटेलिटी को बेच दी थी।
हालांकि कंपनी का अभी तक यह बयान रहा है कि वह इस जमीन खरीद में तीसरी या चौथी पार्टी है। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय की ओर से इस कंपनी को नोटिस जारी किया गया।