राइट टू हेल्थ बिल के नियम और शर्तें
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राइट टू हेल्थ बिल का विरोध
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सरकारी सेवारत चिकित्सकों का एलान?
अखिल राजस्थान सेवारत चिकित्सक संघ (ARISDA) ने 28 मार्च को दो घंटे का पेनडाउन और 29 मार्च को सामूहिक अवकाश पर जाने का ऐलान किया है। ARISDA प्रदेशाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मण सिंह ओला और प्रदेश महासचिव डॉ. दुर्गाशंकर सैनी ने आंदोलनकारी चिकित्सकों से वार्ता और सेवारत चिकित्सकों की लंबित मांगों पर संज्ञान नहीं लेने तक राज्य सरकार को सामूहिक अवकाश पर जाने की चेतावनी दी है। उन्होंने इसे चिकित्सक अस्मिता का आंदोलन बताते हुए एकता के साथ आंदोलन में शामिल होने की बात कही है। सूत्रों के मुताबिक इससे करीब 14 हजार सरकारी क्षेत्र के चिकित्सक और चिकित्सा कर्मी आंदोलन पर जा सकते हैं।
क्या है डॉक्टर्स की मांग?
- जब तक राइट टू हेल्थ बिल को वापस नहीं लिया जाएगा, आंदोलन और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। बिल वापसी पर डॉक्टर्स अड़े हैं।
- डॉक्टर्स का आरोप है कि यह बिल लागू होने पर प्राइवेट अस्पतालों में भी सरकारी अस्पतालों जैसी अव्यवस्थाएं और भीड़ बढ़ जाएगी। निजी अस्पतालों के कामकाज और उपचार में सरकार का सीधे दखल बढ़ जाएगा।
- डॉक्टर्स का आरोप है कि इमरजेंसी शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है। कोई भी मरीज या उसका परिजन इमरजेंसी की बात कहकर किसी भी अस्पताल में इलाज के लिए पहुंच जाएगा। फ्री इलाज करने की बात करेगा।
- इससे अस्पताल, डॉक्टर्स और मरीज के परिजनों में झगड़े और टकराव बढ़ेंगे। कोर्ट-कचहरी और मुकदमेबाजी आम हो जाएगी। इसलिए बिल को वापस लिया जाए।
बिल को लेकर डॉक्टरों का डर
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क्या है प्राइवेट और सरकारी डॉक्टर्स का डर?
- आंखों के अस्पताल में अन्य बीमारी या हादसे से ग्रसित मरीज आ गया, तो उसका इलाज कैसे संभव है।
- महिलाओं की डिलीवरी और गायनी अस्पताल में हार्ट पेशेंट या स्नेक बाइट का मरीज आ गया, तो वहां इमरजेंसी की हालत में भी उसका इलाज सम्भव नहीं है। इसलिए डॉक्टरों को इमरजेंसी के नाम पर सभी मरीजों का इलाज करने को बाध्य करना उचित नहीं है। यह तकनीकि और साइंटिफिकली अनुचित है।
- RTH लागू होने पर हर मरीज के इलाज की गारंटी डॉक्टर की हो जाएगी। कोई गंभीर मरीज अस्पताल पहुंचा और अस्पताल में इलाज संभव नहीं है, तो स्वाभाविक रूप से मरीज को बड़े या संबंधित स्पेशलाइजेशन वाले अस्पताल में रेफर करना पड़ेगा।
- रेफर के दौरान बड़े अस्पताल पहुंचने से पहले अगर मरीज की मौत हो गई, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा और उसकी गारंटी कौन लेगा ?
- रेफर होने वाले मरीज की मौत नहीं हो, इसकी गारंटी डॉक्टर कैसे ले सकते हैं? इसलिए बिल के प्रावधान के कारण प्राइवेट हॉस्पिटल और मरीज के परिजनों में झगड़े-विवाद होंगे और मुकदमेबाजी बढ़ेगी।
- प्राइवेट और सरकारी डॉक्टर्स का सबसे बड़ा डर यह है कि उन्हें सरकारी रेट पर मरीजों का इलाज करना होगा।
- मरीज के बिल का भुगतान जब सरकार से मांगा जाएगा, तो उसमें बहुत लेट लतीफी होगी और 6 महीने तक लग सकते हैं।
- विवाद की स्थिति में भुगतान पेंडिंग में भी चल सकता है।
- प्राइवेट अस्पतालों में इलाज की रेट और सरकारी अस्पतालों में इलाज की रेट अलग-अलग होती है। सरकार अपनी तय रेट के हिसाब से भुगतान के लिए अस्पतालों को बाध्य करेगी।
- मरीज को इलाज देने के बाद प्राइवेट हॉस्पिटल को अपनी एम्बुलेंस से ही ट्रांसफर करना, शिफ्ट करना या घर छोड़ना पड़ेगा। इससे क्रिटिकल मरीजों की क्वालिटी केयर पर असर पड़ेगा।
- राजस्थान के अस्पतालों में व्यवस्थाएं चरमराने पर मरीज दिल्ली-मुम्बई जैसे महानगरों में इलाज के लिए जाने को मजबूर होंगे। यह बिल राजस्थान में चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं को दो दशक पीछे धकेलने वाला कदम साबित हो सकता है।
- घाटे और आर्थिक तंगी, अव्यवस्थाओं के कारण प्रदेश के प्राइवेट हॉस्पिटल्स बंद होने के कगार पर आ सकते हैं।
- डॉक्टर्स का तर्क है कि इंदिरा रसोई की तर्ज पर सरकार प्राइवेट होटल, रेस्टोरेंट को राइट टू फूड के लिए जिस तरह मजबूर नहीं कर सकती है। उनकी क्वालिटी के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता है, उसी तरह प्राइवेट हॉस्पिटल में भी दखल नहीं दिया जाना चाहिए।
- डॉक्टर्स का कहना है कि बहुत कम और बड़े ट्रस्ट के अस्पतालों को ही सरकार ने रियायती जमीनें दी हैं, उन पर सरकार चाहे तो बिल लागू कर सकती है। लेकिन सभी प्राइवेट अस्पतालों पर बिल को लागू नहीं किया जाना चाहिए।
- प्राइवेट हॉस्पिटल या हेल्थ केयर सेंटर में किराया, बिजली का बिल, डॉक्टर्स, मेडिकल, पैरामेडिकल, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की सैलरी, हाइजीन, सुविधाओं, एयरकंडीशनिंग, महंगी मशीनों, उपकरणों के बिल, ईएमआई, खर्चे अस्पतालों को चुकाने पड़ते हैं। सरकार प्राइवेट हॉस्पिटल को ये सारी सुविधाएं और चार्ज उपलब्ध करवाने को तैयार है, तो प्राइवेट डॉक्टर्स फ्री या सरकारी रेट्स पर सर्विसेज देने को तैयार हैं।
- रेजीडेंट डॉक्टर्स के बाद सरकारी सेवारत डॉक्टर्स ने भी डॉक्टर्स के समर्थन में हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। सेवारत डॉक्टर्स भी बड़ी संख्या में प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं। क्लीनिक और हेल्थ केयर सेंटर चलाते हैं। सूत्रों के मुताबिक बहुत से डॉक्टर्स प्राइवेट अस्पतालों में ऑपरेशन और प्रैक्टिस भी करते हैं। बिल का असर उन पर भी पड़ेगा। सरकारी सेवा से रिटायरमेंट के बाद खुद का प्राइवेट हॉस्पिटल खुलने की मंशा रखने वाले डॉक्टर्स भी बिल से चिंतित हैं।
बिल को लेकर सरकार का मत
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