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'पधारो म्हारे देस' को सुनकर आने वाले विदेशी मेहमान ये देखकर वापस नहीं आएंगे

Fri, 12 Jan 2018 03:02 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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गडीसर सरोवर में टूटी सीढ़ियां और सरोवर में टूटी मूर्ति - फोटो : amar ujala
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राजस्थान की संस्कृति और इसके भव्य महल, हवेलियां देखने विदेशों से पर्यटक यहां आते हैं, लेकिन यहां सरकार की बेरुखी शायद इन्हें यहां वापस नहीं बुलाए।
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यहां हम बात कर रहे हैं जैसलमेर के ऐतिहासिक गडीसर सरोवर की, जो इन दिनों अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। सरकारी संरक्षण के अभाव में ऐतिहासिक सरोवर पर बनी प्राचीन छतरियां क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। वहीं, सरोवर में फैली गंदगी स्वच्छ भारत अभियान का भी मजाक उड़ा रही है। सरोवर पर बने घाट की सीढ़ीयां जर्जर होकर टूटने लगी हैं और यहां बनी ऐतिहासिक मूर्तियां भी टूटकर सरोवर में गिरने लगी हैं। ऐसे में यहां आने वाले टूरिस्ट को भी निराशा ही हाथ लग रही है।

पर्यटकों का भी कहना है कि वे यहां इसके ऐतिहासिक और कलात्मकता को निहारने के लिए आए, लेकिन उन्हें यहां टूटी सीढ़ियां और सरोवर में गंदा पानी ही देखने को मिला।
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धार्मिक महत्व भी है सरोवर का

गडीसर सरोवर में फैली गंदगी
गडीसर सरोवर पर्यटन के नक्शे के साथ-साथ जैसलमेर की आम जनता के लिए भी विशेष महत्व रखता है। इसके बावजूद यहां सरकारी तंत्र की उदासीनता छाई हुई है। सरोवर में गणगौर का मेला, गणेश चतुर्थी पर गणेश विसर्जन, तीज का मेला सहित अन्य कई हिंदू त्योहार पर बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। वहीं, यहां ये भी सामने आया है कि कुछ लोग यहां विभिन्न तरीकों से बढ़ावा दे रहे हैं जिससे पवित्र सरोवर को धार्मिक महत्व भी कम होता जा रहा है।

स्वयंसेवी संगठनों की ओर से भी कई बार सरोवर की दुर्दशा को लेकर नगर परिषद से गुहार लगाई गई है लेकिन हालात जस के तस हैं।
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