राजस्थान हाईकोर्ट ने झुंझनुं की टमकोर ग्राम पंचायत में सरकारी भूमि पर पट्टे जारी करने के मामले में उचित जांच नहीं करने पर अदालत में पेश डीजीपी को पुलिस की कार्यप्रणाली बताते हुए कहा कि जांच अधिकारी को लापरवाही से काम नहीं करना चाहिए।
प्रकरण में अब तक इस तरह जांच की गई है मानो जांच की जरूरत ही नहीं हो। इसके साथ ही अदालत ने प्रकरण में दो सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश विजयकुमार भंसाली की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान डीजीपी अदालत में पेश हुए। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट की ओर से मॉनिटरिंग होने के बाद भी प्रकरण में प्रभावी जांच नहीं की जा रही है। जांच अधिकारी ने पट्टों का रिकॉर्ड तक बरामद नहीं किया है। इस पर डीजीपी ने अदालत को आश्वस्त करते हुए कहा कि पूरी ईमानदारी के साथ जांच कराई जाकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। इस पर अदालत ने पन्द्रह दिन में जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
याचिका में अधिवक्ता हनुमान चौधरी ने बताया कि ग्राम पंचायत का सरपंच बनने के बाद याचिकाकर्ता की ओर से वर्ष 2010 में मलसीसर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि पूर्व सरपंच गौकुलचंद ने पंचायत का रिकॉर्ड मुहैया नहीं कराया और सरकारी भूमि पर सैकड़ों पट्टे काटकर अपने चहेतों को भूमि बांट दी। एफआईआर पर तत्कालीन जांच अधिकारी ने प्रकरण को सिविल नेचर का बताकर एफआर पेश कर दी। जिसमें अदालत ने अग्रिम जांच के आदेश दिए। वहीं अदालती आदेश के बावजूद रिकॉर्ड मुहैया नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए डीजीपी को पेश होने के आदेश दिए थे।