राजस्थान के बाड़मेर में प्रस्तावित रिफाइनरी पर से विवाद के बादल छंटते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने बृहस्पतिवार को विधानसभा में ऐलान किया कि इस रिफाइनरी के लिए जल्द ही एचपीसीएल के साथ नए प्रस्तावों के अनुरूप एमओयू साइन होगा।
मुख्यमंत्री राजे राजस्थान विनियोग विधेयक पर हुई चर्चा के जवाब में कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने बाड़मेर में रिफाइनरी के लिए बिना सोच-विचार किए एमओयू किया था, जबकि हमारी सरकार ने प्रदेश के हितों के साथ कोई समझौता मंजूर नहीं किया। राजे ने दावा किया कि एचपीसीएल ने अपने पुराने प्रस्ताव बदल को तैयार है। ऐसे में रिफाइनरी की स्थापना से पड़ने वाला वित्तीय भार परियोजना की लागत बढ़ने के बावजूद करीब दो-तिहाई घटकर अब 20 हजार 583 करोड़ रुपए रह गया है। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही एचपीसीएल के नये प्रस्ताव के मुताबिक रिफाइनरी के लिए एमओयू होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा एचपीसीएल के साथ किए गए एमओयू के मुताबिक राज्य सरकार को 15 वर्ष तक प्रतिवर्ष ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 3 हजार 736 करोड़ रुपए देने पड़ते, जो रि-नेगोशिएशन से अब मात्र 1 हजार 123 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष ही रह गया है।
इस तरह 15 वर्षों में ब्याज मुक्त ऋण के रूप में दी जाने वाली राशि 56 हजार 40 करोड़ रुपए से घटकर 16 हजार 845 करोड़ रुपए ही रह गई है। पिछली सरकार ने रिफाइनरी में 26 प्रतिशत इक्विटी के रूप में 3871 करोड़ देना तय किया था। नये प्रस्ताव में यह राशि भी घटकर 3738 करोड़ रह गई है।