आज राजस्थान अपना 68वां स्थापना दिवस मना रहा है। अपनी दिलचस्प लोक कला और संस्कृति के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है। राजस्थान, समृद्ध संस्कृति के साथ-साथ हैरतंगेज अतीत, खासतौर पर यहां के राजा-महाराजाओं के रोचक किस्सों के लिए जाना जाता है।
इसके अतीत की कहानी जानने से पहले यह जान लेना भी जरूरी है कि फिलहाल भौगोलिक तौर पर यह देश (देश के कुल क्षेत्रफल का 10.41 फीसदी) का सबसे बड़ा प्रदेश (342,239 वर्ग किमी) है। जनसंख्या के लिहाज से 2011 की जनगणना के मुताबिक (68,621,012) यहां देश के तकरीबन 5.67 फीसदी लोग रहते हैं। राजस्थान का अतीत दुनिया की सबसे पुरानी सिंधु घाटी सभ्यता के निशान समेटे हुए है। यकीनन इसे सभ्यताओं का पालना कहा जा सकता है जहां सभ्यता और संस्कृति का अविरल प्रवाह जारी है।
हनुमानगढ़ जिले में घग्गर-हकरा नदी के किनारे मौजूद कालीबंगा उस अतीत की कहानी बयां करता है जब पूरी दुनिया आदिम जीवन जी रही थी और यहां उन्नत सभ्यता और संस्कृति मौजूद थी। बहरहाल, प्राचीन काल के बाद राजस्थान को अब इसके राजसी शानो-शौकत के लिए जाना जाता है।
भारत में विलय की कहानी
30 मार्च, 1949 को राजस्थान भारत गणराज्य का हिस्सा बना। राजा-रजवाड़ों के किस्सों की ही तरह राजस्थान का भारत में विलय भी दिलचस्प कहानी की तरह है। 1947 में जब देश आजाद हुआ था तो मुगल और अंग्रेजों की शासन पर पकड़ खत्म हो चुकी थी और देशी रियासतों ने फिर से ताकत जुटाना शुरू कर दिया था।
मौजूदा राजस्थान के भौगोलिक क्षेत्र के लिहाज से देखें तो आजादी के वक्त राजस्थान में 22 रियासतें थीं जिनमें से केवल अजमेर (मेरवाड़ा) ब्रिटिश शासन के कब्जे में था बाकी 21 रियासतें स्थानीय शासकों के अधीन थीं। ब्रिटिश सरकार से भारत के आजाद होते ही अजमेर रियासत भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 के करारों के मुताबिक खुद-ब-खुद भारत का हिस्सा बन गई।
शेष 21 रिसासतों में से ज्यादातर राजा खुद को स्वतंत्र राज्य बनाने की मांग कर रहे थे। राजाओं का कहना था कि उन्होंने आजादी के लिए संघर्ष किया है और उन्हें शासन चलाने का अच्छा तजुर्बा भी है इसलिए उनके राज्यों को स्वतंत्र राज्य के तौर पर भारत में शामिल किया जाए और शासन उनके ही अधीन बना रहने दिया जाए।
18 मार्च, 1948 को सरदार वल्लभ भाई पटेल और उनके सचिव वी.पी. मेनन ने एकीकृत राजस्थान के लिए अलग-अलग राजाओं को भारत में शामिल होने की प्रक्रिया के लिए राजी करने की कोशिशें शुरू कीं और नवंबर 1956 में मौजूदा राजस्थान बना।