सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले से नाबालिग बेटियों की जिंदगी की राह अब आसान हो जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के 18 वर्ष से कम उम्र की पत्नी के साथ सबंध बनाने को दुष्कर्म की श्रेणी मे रखने के फैसले का सबसे अधिक असर शायद राजस्थान में देखने को मिलेगा। क्योंकि राजस्थान में सबसे अधिक बालिका वधु के मामले सामने आते हैं।
बाल विवाह में अग्रणी राजस्थान में सरकारी आंकड़ें चौंकाने वाले है। वर्ष 2011 के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान में 6.3 फीसदी लड़कियां 15-19 वर्ष की उम्र के बीच या तो गर्भवती हो जाती हैं या मां बन जाती है। यह नतीजा है बाल विवाह का और उसके बाद लड़की की परवाह किए बिना बनाए शारीरिक सबंध का। जिस कारण कई मौकों पर गर्भवती लड़की की मौत तक हो जाती है।