प्रदेश के पुलिस मुखिया ने एक फरमान जारी किया है। जिसके बाद यहां राजस्थान के पुलिस महकमे में चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि आखिर विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ये कैसी लगाम?
दरअसल, पुलिस मुखिया की ओर से दिए गए फरमान में राजस्थान के पुलिसकर्मी और अधिकारी सोशल मीडिया पर फेसबुक, व्हाट्स एप और ट्विटर पर सरकार की आलोचना और राजनीतिक संदेश ना तो पोस्ट कर सकेंगे और ना ही एक-दूसरे को फॉरवर्ड कर सकेंगे। इस आदेश के तहत ये भी हवाला दिया गया है कि पुलिसकर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर ऐसे मैसेज भेजने या पोस्ट करना राजस्थान सिविल सेवाएं आचरण नियम 1971 के नियम संख्या 7 व 11 तथा राजस्थान पुलिस नियम 1948 के नियम संख्या 82 का उल्लंघन माना जाएगा। यह दुराचरण की श्रेणी में आएगा।
राजस्थान पुलिस के डीसीपी ओपी गल्होत्रा ने आदेशों में कहा है कि इन आदेशों की कॉपी पुलिस थानों और कार्यालयों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा करवा कर अधीनस्थकर्मियों के ध्यान में लाने के निर्देश दिए गए हैं।
कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश
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- फोटो : Demo pic
आदेश में ये भी कहा गया है कि क्राइम मीटिंग, पुलिस थाने, चौकियों, कार्यालयों के निरीक्षण के वक्त अधीनस्थ अधिकारियों व पुलिस कार्मिकों को इन निर्देशों की पालना करवाई जाए। आदेश में डीजीपी गल्होत्रा ने कहा है कि पुलिस मुख्यालय के ध्यान में आया है कि कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा सोशल मीडिया पर राजनीतिक संदेश पोस्ट और फॉरवर्ड किए जा रहे हैं।
इन संदेशों के माध्यम से सरकार के किसी कदम या नीति की आलोचना को अनुचित व अशोभनीय आचरण मानते हुए ऐसा करने वाले कार्मिकों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही, डीजीपी गल्होत्रा ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि उनके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत आने वाले ऐसे अधीनस्थ पुलिसकर्मियों की सोशल मीडिया पर ऐसी गतिविधियों को गंभीरता से लें। साथ ही, इस आचरण को अनुचित और अशोभनीय मानते हुए कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करें।