एक कलियुगी कंस मामा ने अपनी भांजी को उसके ताऊ के साथ मिलकर चंद रुपयों के लिए उसका सौदा कर दिया। मध्यप्रदेश से लड़की का सौदा करने आए उसके मामा और ताऊ जब अलवर पहुंचे तब जाकर पूरे मामला खुलकर सामने आया।
दरअसल अलवर में मानव तस्करी विरोधी यूनिट ने गोविंदगढ़ थाना पुलिस के सहयोग से महिलाओं की खरीद फरोख्त करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस की कार्रवाई में इस गिरोह के चार जने पुलिस के हत्थे चढ़ गए जबकि एक अब भी फरार चल रहा है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मूलचंद राणा ने बताया कि 9 सितंबर 2017 को शाम 4 बजे गोविंदगढ़ पुलिस को सूचना मिली कि डाबरी में एक मकान के पास एक लड़की है जो मध्यप्रदेश के आदिवासी इलाके की रहने वाली है। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने लड़की से पूछताछ की तो उसने गिरोह को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया।
मथुरा से लाए थे ट्रेन में
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
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अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया की लड़की को बेचने,देह शोषण कराने सहित कई मामलों में आरोपी गोविंदगढ़ पुलिस थाना नगर बटवारा गांव निवासी विश्राम गुर्जर ,उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के जटवाली गांव निवासी विजय, मध्य प्रदेश के आदिवासी इलाके के कमली आदिवासी एवं मध्य प्रदेश के ही तेंदुआ ग्राम पंचायत के भूतपूर्व सरपंच त्रिभान सिंह को गिरफ्तार किया है।
लड़की ने बताया कि मध्यप्रदेश में रहने वाली ताई पिश्ता, ताऊ अमली एवं मामा रघुराज उसे गांव से मथुरा ट्रेन में लेकर आए। यहां उन्होंने विजय नाम के व्यक्ति को 60 हजार रुपए लेकर शादी करने की इरादे से बेच दिया। इसके बाद अलवर का रहने वाला विजय नाम का शख्स उसे मोटरसाइकिल पर बैठा कर गांव बटवारा ले आया जहां उसने लड़की को घर में छुपाकर रखा था।
बिन मां की बच्ची का फायदा उठाना चाहता था मामा
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गोविंदगढ़ पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बरामद लड़की वर्तमान में आरती बालिका गृह अलवर में रह रही है। जांच में यह बात सामने आई है कि बालिका की मां की मौत 10 वर्ष पूर्व हो चुकी थी जिसके बाद उसके पिता उसी समय घर छोड़कर कहीं चले गए थे। पीड़ित बालिका के दो बहन और एक भाई है।