स्पूफिंग के जरिये अन्तरराष्ट्रीय कॉल कर अफसरों से चौथ वसूली करने के आरोप में भ्रष्टाचार निरोधक पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपित को आज कोर्ट में पेश किया गया। पूर्व मंत्री के पौते आरोपी साहिल राजपाल को कोर्ट ने 14 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
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वारदात के लिए इंटरनेशनल सर्वर कॉलिंग के लिए आरोपी साहिल खुद को एसीबी में एडिशनल एसपी शंकरदत्त शर्मा होना बताता था। फिर भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे अधिकारियों को धमकाकर केस निपटाने की एवज में रुपयों की मांग करता था।
उसने गत जनवरी माह में जयपुर में पीएचईडी के एक इंजीनियर से जहां 10 लाख रुपए मांगे और फिर डेढ़ लाख रुपए वसूल कर लिए। वहीं, भ्रष्टाचार के एक केस में फंसी नई दिल्ली की एक कंपनी के अधिकारियों से संपर्क कर 10 करोड़ रुपए की मांग की।
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अमेरिका, हांगकांग, दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, कनाडा में संपर्क
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नई दिल्ली की कंपनी में आरोपी अधिकारी खुद के केस को निपटाने के लिए करीब दो करोड़ रुपए तक देने को राजी भी हो गए थे। बाद में, शक होने पर सीबीआई को शिकायत की गई। फरवरी माह में केस दर्ज होने पर एसीबी राजस्थान के आईजी सचिन मित्तल के निर्देशन में केस की तफ्तीश शुरू की गई।
जिसमें पुलिस ने करीब आठ माह में नौ देशों, जिनमें अमेरिका, हांगकांग, दक्षिण अफ्रीका, सिंगापुर, कनाडा में मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों से संपर्क किया। आखिरकार, चाइना से आरोपी साहिल के मोबाइल का आईपी एड्रेस एसीबी को मिला। तब जाकर एसीबी टीम आरोपी तक पहुंची।
इसके बाद राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के रहने वाले पूर्व मंत्री व विधायक राधेश्याम गंगानगर के पौते साहिल को एसीबी ने कल जयपुर में भाजपा विधायक मोहनलाल गुप्ता के नाम से आवंटित सरकारी क्ववार्टर से धरदबोचा।
हालांकि, विधायक गुप्ता ने एक अगस्त को ही क्वार्टर खाली करने की बात कही है। उन्होंने क्वार्टर में साहिल के ठहरने की जानकारी होने से भी इनकार किया है। अब इस मामले की जांच एसपी तेजस्विनी गौतम को सौंपी गई है।
एसीबी के अनुसार साहिल ने फर्जी इंटरनेशनल कॉलिंग से अधिकारी बनकर धमकियां दी और करोड़ों रुपए हड़पे हैं। अब पुलिस टीमें श्रीगंगानगर व अन्य संभावित जगहों पर साहिल से जुड़े अन्य साथियों को पकड़ने में जुटी है।