3 सितंबर, 2015 के दिन कोर्ट पेशी से लौटते वक्त आनंदपाल अपने दो साथियों श्रीवल्लभ और सुभाष मुंड के साथ परबतसर नागौर में पुलिस पर फायरिंग कर हिरासत से भाग निकला था। तब से राजस्थान पुलिस के लिए उसे पकड़ना खुला चेलेंज था। इसके बाद पिछले 21 माह से वह राजस्थान और आसपास के राज्यों में फरारी काट रहा था।
यह टीम एटीएस के आईजी दिनेश एमएन के निर्देशन में डेढ़ सौ पुलिसकर्मियों की टीम को आनंदपाल की तलाश थी। कई बार आनंदपाल के चुरु, नागौर, जयपुर और आसपास के जिलों में देखे जाने की सूचना मिली भी मिली। इन्हीं में करीब साल भर पहले नागौर जिले में फिर से आनंदपाल नाकाबंदी को देख भाग निकला था। इस दौरान उसने फायरिंग की। जिसमें कमांडो फोर्स का जवान खुमाराम गोली लगने से शहीद हो गया था।
डीजीपी मनोज भट्ट ने करीब दो माह पहले एसओजी के आईजी दिनेश एमएन को छतरगढ़ थानाधिकारी हंसराज ने आनंदपाल का भाई विक्की और गट्टू व अन्य ईनामी अपराधी तेजपाल, बलबीर निमोद हरियाणा में ही किसी जगह पर रह रहे है। तब एडिशनल एसपी संजीव भटनागर के निर्देशन में पुलिस इंस्पेक्टर सूर्यवीर सिंह राठौड़, इंस्पेक्टर मनोज गुप्ता को करीब डेढ़ माह की पड़ताल के बाद इन सभी बदमाशों के हरियाणा के सिरसा में छिपकर रहने की सूचना मिली।
कारोबारी से 70 लाख रुपए की लूट की वारदात की थी, ताकि फरारी काट सके।
मालासर का मकान, जहां एनकाउंटर हुआ
- फोटो : Vishnu Sharma
स्पेशल टीम की पड़ताल में सामने आया कि आनंदपाल और उसके साथी हथियारबंद है। वे लोग कभी कभार अपने मिलने वालों के यहां पनाह ले लेते तो कभी खानाबदोश होकर जीवन गुजारने लगे। उन्हें फरारी काटने के लिए रुपयों की जरुरत थी। इसके लिए उन्होंने करीब छह माह पहले ही हरियाणा के भादरा जिले में एक कारोबारी से 70 लाख रुपए की लूट की वारदात की थी, ताकि फरारी काट सके।
वे कभी—कभी टाइम पास के लिए सिरसा भी जाते थे और वहां ओएचएम मॉल में समय काटने के लिए पिक्चरें भी देखते थे। इसी दौरान यह जानकारी भी मिली कि आनंदपाल सिंह अपने गैंग के साथियों के साथ सिरसा के गांव शेरपुरा में सुरेंद्र महरिया उर्फ प्रधान के रिहायशी मकान में फर्जी नाम से रह रहे थे। इस सूचना पर कुचामन सिटी सीओ विद्याप्रकाश चौधरी, इंस्पेक्टर सूर्यवीर सिंह, कांस्टेबल हरिराम, ईआरटी कमांडो सोहन सिंह, संदीप व डीग से एसपीओ नरेश कुमार को 21 जून को एएसपी संजीव भटनागर के निर्देशन में आनंदपाल के पनाहगार सुरेंद्र महरिया के मकान के आसपास पड़ौस के दो मकानों में तैनात कर दिया गया।
35 पुलिसकर्मियों की टीम ने अमावस्या की रात आॅपरेशन का वक्त चुना
एनकाउंटर के बाद मालासर में भीड़
- फोटो : Vishnu Sharma
गत 24 जून को शाम करीब साढ़े छह बजे आनंदपाल का भाई विक्की उर्फ रुपेंद्रपाल तथा देवेंद्रपाल सिंह उर्फ गट्टू एक बाइक से सुरेंद्र महरिया के मकान पर पहुंचे। जहां पुलिस टीमों ने उन्हें दबोच लिया। पूछताछ में दोनों भाईयों ने आनंदपाल सिंह के चुरु जिले के रतनगढ़ और सरदार शहर के बीच गांव में मालासर में श्रवणसिंह राजपूत के मकान में ठहरने की सूचना दी।
एएसपी संजीव भटनागर ने यह सूचना आईजी दिनेश एमएन को दी। तब एसपी चुरु राहुल बारहट, एएसपी केसर सिंह, योगेंद्र फौजदार, करण शर्मा के निर्देशन में टीम में चुरु, अजमेर, नागौर, ईआरटी, पुलिस कमिश्नरेट और सिरसा हरियाणा की स्थानीय पुलिस के करीब 35 पुलिसकर्मियों की टीम ने शनिवार को अमावस्या की रात को आॅपरेशन का वक्त चुना।
रात करीब साढ़े 10 बजे श्रवण सिंह राजपूत के मकान को घेर लिया। इसके बाद मकान में घुसकर इंस्पेक्टर सूर्यवीर सिंह ने आनंदपाल को समर्पण के लिए कहा। इसके बाद आनंदपाल मकान की छत पर पहुंच गया। वहां से एके 47 से फायरिंग की। तब जाकर पुलिस की फायरिंग में आनंदपाल मारा गया।