राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि गृह निर्माण सहकारी समितियों का बिना मालिकाना हक और भूमि पर भौतिक कब्जा जांचे बिना पट्टे जारी नहीं किए जाएं। इसके साथ ही अदालत ने भूमि संबंधी धोखाधड़ी रोकने के लिए प्लान पेश करने के आदेश दिए हैं।
न्यायाधीश बनवारीलाल शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश सोमवार को दिए। अदालत ने मामले में अधिवक्ता अनूप ढंड, अजय कुमार जैन और महेश गुप्ता को न्यायमित्र भी नियुक्त किया है। सुनवाई के दौरान यूडीएच, जेडीए और सहकारिता विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के करीब एक दर्जन अधिकारी पेश हुए। अदालत के सामने आया कि शहर में करीब 160 गृह निर्माण सहकारी समितियां हैं। इनमें से करीब दस समितियों के भूमि विवाद अधिक सामने आ रहे हैं। अदालत के सामने यह भी आया कि केवल एग्रीमेंट के आधार पर पट्टे जारी हो रहे हैं। जिसके चलते एक भूखंड के एक से अधिक पट्टे भी जारी हो जाते हैं। इस पर अदालत ने बिना मालिकाना हक और भौतिक कब्जा जांचे भूखंड का पट्टा जारी करने पर रोक लगाते हुए मामले की सुनवाई सितंबर माह में रखी है।