राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रमुख पंचायती राज सचिव और धौलपुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को नोटिस जारी कर पूछा है कि वर्ष 2012 की तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती में धौलपुर-भरतपुर के जाटों को ओबीसी आरक्षण का लाभ क्यों नहीं दिया गया है। इसके साथ ही अदालत ने नियुक्तियों को याचिका में निर्णयाधीन रखा है।
न्यायाधीश वीएस सिराधना की एकलपीठ ने यह आदेश धीरजसिंह जाट व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। याचिका में कहा गया कि तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती-2012 का तीसरा परिणाम गत दिसंबर माह में जारी किया गया। जिसमें याचिकाकर्ता का ओबीसी वर्ग में चयन हुआ था। वहीं गत मई माह में राज्य सरकार ने यह कहते हुए चयन निरस्त कर दिया कि अदालती आदेश के चलते धौलपुर-भरतपुर के जाटों को ओबीसी आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
याचिका में कहा गया कि अदालत ने भविष्य की भर्तियों में इन्हें आरक्षण का लाभ नहीं देने को कहा था। जबकि यह पूर्व की भर्ती है। इसके अलावा इसी भर्ती में पहले धौलपुर-भरतपुर के जाटों को ओबीसी का लाभ दिया जा चुका है। ऐसे में याचिकाकर्ताओं को भी इसका लाभ दिया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करते हुए नियुक्तियों को याचिका के निर्णयाधीन रखा है।