अतिरिक्त सिविल न्यायालय पूर्व ने जयपुर के छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ पर लगे करीब ढाई सौ साल से भी ज्यादा पुराने बड़ के पेड़ों को नहीं काटे जाने के आदेश दिए हैं।
अदालत ने मुख्य सचिव और जिला कलक्टर को जवाब पेश करने का समय देते हुए 18 अगस्त तक यथा-स्थिति बनाए रखने के लिए पाबंद किया है। इसके साथ ही राज्य सरकार को जवाब पेश करने को कहा है।
अदालत ने यह आदेश भवानीशंकर शर्मा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि वृक्ष पर्यावरण की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान रखते हैं और मानव जीवन की आवश्यताओं को पूरा करने में सहयोग देते हैं। अधिवक्ता उमेश पुरोहित ने कहा कि पिछले कुछ सालों से सौन्दर्यीकरण के नाम पर छोटी और बड़ी चौपड़ पर तोड़फोड़ की जा रही है और उसका प्राचीन स्वरूप बदला गया है।
स्थानीय प्रशासन बड़ी चौपड़ पर माणक चौक थाने के बाहर ढाई सौ साल पुराने वट वृक्ष को हटाने पर आमादा है। यह पेड़ 1770-80 के बीच यहां लगाया गया था। तब से यह राहगीरों को छाया दे रहा है। इसके अलावा हजारों पक्षियों का भी इस पर बसेरा है। इसके अलावा शहरवासी इससे भावनात्मक रूप से भी जुड़े हुए हैं।