नाबालिग बेटी की जबरन शादी कराने के मामले में मां और एक अन्य सहयोगी को अदालत ने पांच साल की कारावास की सजा सुनाई है।
घटना राजस्थान के जयपुर की है। महिला उत्पीडऩ एवं दहेज प्रकरण मामलों की विशेष अदालत क्रम-2 ने नाबालिग बेटी का अपहरण कर जबरन शादी कराने वाली मां ऊषा देवी और सहयोगी मोहनलाल को पांच साल की सजा सुनाई है। सजा के साथ ही अदालत ने प्रत्येक अभियुक्त पर तीस हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। जुर्माना राशि जमा होने पर अदालत ने 55 हजार रुपए पीडिता को अदा करने को कहा है।
अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि नाबालिग लड़की के दादा ने 28 अगस्त 2014 को सोड़ाला थाने में मामला दर्ज कराया था कि उसकी पोती का जबरन विवाह कराने के लिए अभियुक्त पोती को यूपी लेकर गए हैं। ऐसे में नाबालिग की हो रही शादी को रुकवाया जाए। जिस पर कार्रवाई करते हुए अदालत ने अभियुक्तों को गिरफ्तार कर बच्ची को बरामद किया। प्रकरण में निरूद्व किए गए दो नाबालिगों के खिलाफ बाल न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है।