नए साल पर देश में कोरोना का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि चीन और दुनिया के दूसरे देशों में फैल रहे संक्रमण का 30-40 दिनों में भारत पर असर हो सकता है। जनवरी में कोरोना की नई लहर आने का खतरा है। ऐसे में राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ एंड साइंसेज के वाइस चांसलर डॉ. सुधीर भंडारी ने बताया, दूसरी लहर में जब अमेरिका, जो कि आबादी में हमसे एक बटा आठवां हिस्सा है। लेकिन जब वहां संक्रमण फैला तो उसके मुकाबले भारत में हुई मौत का अकड़ा 10 प्रतिशत ही रहा था, जिसका प्रमुख कारण हमारा वैक्सीनेशन ड्राइव रहा है।
डॉ. भंडारी बोले कि हमारी वैक्सीन बेहतरीन है, जिससे इम्युनिटी का विस्तार हुआ। आज देश में 95 प्रतिशत लोगों को सेकेंड डोज लगाई जा चुकी है। जबकि 28 प्रतिशत लोगों को बूस्टर डोज भी लगाई जा चुकी है, जिसके कारण ओमिकॉर्न की तीसरी लहर में लोगों को कोविड हुआ जरूर था, लेकिन वेंटिलेटर और आईसीयू की अवशकता बहुत ही कम मरीजों को पड़ी थी। इसलिए पूरी दुनिया में बढ़ते हुए केसेज को देखते हुए चिंता होना स्वाभाविक है। हमारी इम्युनिटी बहुत ही मजबूत है, जिसका कारण है वैक्सीनेशन डोज। इसलिए अगर हम एक बार फिर से वैक्सीनेशन ड्राइव को शुरू कर बचे हुए लोगों को भी बूस्टर लगवाते हैं तो हम एक सुरक्षित स्थिति में होंगे।
'हम दुनिया के मुकाबले काफी सुरक्षित...'
डॉ. भंडारी बोले कि दूसरी सबसे अच्छी बात है कि नेसल वैक्सीन, जिसके चलते आसानी से बूस्टर लगवा सकते हैं और साथ ही सबको कोविड अनुरूप व्यवहार भी शुरू करने की ज़रूरत है। आज भी हम दुनिया के मुकाबले काफी सुरक्षित स्थिति मैं हैं। वैक्सीन को लगे हुए लंबा समय हो चुका है, परंतु आज भी हमारी इम्युनिटी बेहतर है। पूरी दुनिया में जहां 2nd बूस्टर डोसेज लागू हो चुकी है। वहीं हमारे देश में भी सरकार जल्द ही दूसरी बूस्टर को लागू कर सकती है। क्योंकि दूसरे देशों में लागू हो चुकी है, हमारे भी साइंटिस्ट अपनी रिपोर्ट जल्द ही प्रस्तुत कर सकते हैं, जिसके बाद हमारी स्थिति और बेहतर हो जाएगी।
'बच्चों में इम्युनिटी बहुत बेहतर...'
बच्चों के विषय में बात करते हुए डॉ. भंडारी बोले कि बच्चों में इम्युनिटी बहुत बेहतर है। 80 प्रतिशत से ज़्यादा बच्चों में वैक्सीन से पहले ही इम्युनिटी डेवलेप हो चुकी थी। इसलिए बच्चों को लेकर कोई ज़्यादा चिंता नहीं है। पोस्ट कोविड सिंड्रोम के विषय में चर्चा करते हुए डॉ. भंडारी ने बताया, ये नौ महीने तक रह सकते हैं। साथ ही डेल्टा से संक्रमित व्यक्तियों में ब्लड क्लाउट के भी चांस हैं, जिसके चलते हार्ट अटैक और स्ट्रोक की भी संभावना बढ़ी है।
ओमिक्रॉन वाले मरीजों में ब्रेन फोग देख गया है, जिसके कारण याददाश्त कमजोर होना, स्लो होने और ऑन स्पॉट चीजों को भुल जाना भी शामिल है, जिसके बचाव के लिए अच्छा खानपान और नियमित एक्सरसाइज बहुत ज़रूरी है। परंतु अगर समस्या ज़्यादा है तो डॉ. से संपर्क जरूर करना चाहिए। राजस्थान में कोविड को लेकर तैयारियों पर डॉ. भंडारी बोले कि हम तैयार हैं, जब हम विपदा के समय ही बेहतरीन काम कर चुके हैं तो अब तो राजस्थान में वर्ल्ड क्लास सुविधा मौजूद है।