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ओबीसी आरक्षण बिल पर विवाद, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

Tue, 07 Nov 2017 07:56 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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राजस्थान विधानसभा में पिछले दिनों पेश किए आरक्षण बिल को लेकर अदालती विवाद शुरू हो गया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से ओबीसी आरक्षण 21 फीसदी से बढ़ाकर 26 फीसदी करने और गुर्जर सहित अन्य जातियों को अलग से पांच फीसदी देने वाले आरक्षण बिल-2017 को चुनौती देने वाली याचिका पर मुख्य सचिव, एसीएस सामाजिक न्याय और प्रमुख कार्मिक सचिव को नोटिस जारी किए हैं।
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न्यायाधीश केएस झवेरी और न्यायाधीश वीके व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश गंगासहाय शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि इस बिल के संबंध में राज्य सरकार कोई कार्य करती है तो वह उच्चतम न्यायालय में लंबित प्रकरण को प्रभावित करने वाला माना जाएगा। 

 
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हाईकोर्ट रद्द कर चुका है

rajasthan assembly
याचिका में अधिवक्ता जीपी शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार ने आरक्षण बिल 2017 के जरिए गुर्जर सहित पांच जातियों को अलग से पांच फीसदी आरक्षण देते हुए ओबीसी आरक्षण को बढ़ाकर 26 फीसदी कर दिया है। इससे प्रदेश में कुल आरक्षण 54 फीसदी हो गया है, जो इंदिरा साहनी व एम नागराज के फैसले का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार राज्य सरकार पचास फीसदी से अधिक आरक्षण नहीं दे सकती। 

याचिका में यह भी कहा गया कि वर्ष 2015 में भी आरक्षण अधिनियम के तहत आरक्षण पचास फीसदी से अधिक किया गया था, जिसे हाईकोर्ट रद्द कर चुका है। हाईकोर्ट के इस आदेश को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में यथा-स्थिति बनाए रखने को कहा है। राज्य सरकार ने एसएलपी लंबित रहते हुए बिल लाई है। ऐसे में बिल की क्रियान्विती पर रोक लगाई जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। 
 
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