राजस्थान विधानसभा से निलंबित 14 विधायकों में से कांग्रेस के एक दर्जन विधायकों के निलंबन की अवधि एक साल से घटाकर एक दिन कर दी गई है। जबकि बसपा विधायक मनोज न्यांगली और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल सालभर के लिए निलंबित रहेंगे।
विधानसभा स्पीकर कैलाश मेघवाल के चैम्बर में प्रतिपक्ष और सत्ता पक्ष के प्रमुख विधायकों के बीच हुई बातचीत के बाद यह सहमति बनी। इसके बाद सदन में सरकारी सचेतक कालूलाल गुर्जर की ओर से निलंबन वापस लेने का प्रस्ताव रखा। जिस पर स्पीकर ने कांग्रेस के 12 विधायकों के निलंबन की अवधि एक साल से घटाकर एक दिन कर दी। यानि ये 12 विधायक बुधवार को सदन की कार्रवाई में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। बसपा विधायक मनोज न्यांगली और निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल का निलंबन पूरे साल के लिए करने के पूर्व में पारित प्रस्ताव में कोई संशोधन नहीं किया गया।
इससे पहले इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस के विधायक प्रद्युम्न सिंह और नारायण सिंह ने विधानसभा में स्पीकर से उनके चैम्बर में मुलाकात की और 12 कांग्रेसियों का एक साल के लिए निलम्बन पर आपत्ति जताई। बताया जा रहा है कि इस मामले में सीएम वसुंधरा राजे से भी बात की गई है। राजे ने भी स्पीकर मेघवाल से बात की और इसके बाद सदन में इनके निलंबन की अवधि घटाने का प्रस्ताव रखा गया।
गौरतलब है कि इससे सुबह प्रश्नकाल में पूरक प्रश्न पूछने को लेकर कांग्रेस के विधायकों ने हंगामा किया था। इसके बाद स्पीकर ने कांग्रेस विधायक गोविन्द सिंह डोटासरा, रमेश मीणा, धीरज गुर्जर, अशोक चांदना, शकुंतला रावत, मेवाराम जैन, श्रवण कुमार, घनश्याम मेहर, सुखराम विश्नोई, राजेन्द्र यादव, हीरालाल दरांगी, भंवरसिंह भाटी, निर्दलीय विधायक हनुमान बेनीवाल और बसपा के मनोज न्यांगली को निलंबित किया गया है।