देश में पहली बार राजस्थान के 11 जिलों में नवजात को अस्पतालों में डिब्बाबंद और डेयरी का दूध पिलाने पर रोक लगाई गई है। इन अस्पतालों में नवजात को केवल मां का दूध ही पिलाया जाएगा।
नवजात के लिए मां का दूध अमृत के समान माना गया है। मां का दूध बच्चों को कई तरह की बीमारियों से रक्षा करता है। चिकित्सा विभाग ने उदयपुर, अलवर, चित्तौड़गढ़, बारां, टोंक, ब्यावर, भरतपुर, बांसवाड़ा, बूंदी, चूरू और भीलवाड़ा में स्थित अस्पतालों में नवजातों को डेयरी और डिब्बाबंद दूध पिलाने पर रोक लगाई है। इन जिलों के अस्पतालों में भर्ती नवजात को मां का दूध ही पिलाना पड़ेगा।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव वीनू गुप्ता ने इस संबंध में वीसी के जरीये संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए है। इन सभी जिलों के अस्पतालों में मदर मिल्क बैंक स्थापित किए गए हैं। यदि किसी मां के बच्चे का पर्याप्त दूध नहीं मिल पा रहा है तो उन्हें इन मिल्क बैंकों के जरिये दूध उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही यह भी आदेश दिया गया है कि कोई भी डॉक्टर किसी प्रसूता को बच्चे के लिए बाहर का दूध पिलाने के लिए बाध्य नहीं करेगा और ना ही कोई परिजन नवजात को बाहर का दूध लाकर पिला सकेगा। इस पर अस्पताल प्रशासन की खास नजर रहेगी।