प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों में पीएचडी करने के लिए अब केवल साक्षात्कार से काम नहीं चलने वाला, बल्कि इसके लिए लिखित परीक्षा देनी होगी। ये परीक्षा महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के माध्यम से करवाई जाएगी।
उदयपुर में एमपीयूएटी की 49वीं अकादमी परिषद की कुलपति सचिवालय में हुई बैठक में ये निर्णय लिया गया है। इसके तहत अब कृषि विश्वविद्यालयों में पीएचडी करने वालों को प्रवेश परीक्षा के जरीये ही प्रवेश दिया जाएगा। कुलपति प्रो.उमाशंकर शर्मा ने बताया कि यह प्रवेश परीक्षा अगले महीने में आयोजित की जाएगी। अकादमिक सत्र 2017—18 से इस प्रवेश परीक्षा के माध्यम से जयपुर, उदयपुर, कोटा, जोधपुर और बीकानेर कृषि विश्वविद्यालय में पीएचडी की सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा।
बैठक में ये भी निर्णय लिया गया कि अब तक छात्रों को मूल्यांकन में ओजीपीए दी जाती थी लेकिन अब ओजीपीए के आधार पर प्रथम से तृतीय श्रेणी का प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा। साथ ही, शैक्षणिक भ्रमण के लिए विद्यार्थियों को 200 रुपए प्रतिदिन भत्ता मिलेगा। बैठक में कृषि संकाय में पशुधन उत्पादन विभाग के तहत वर्ष 2017-18 से एम.एस.सी.(कृषि) पशुधन उत्पादन प्रबंधन तथा पीएचडी पशुधन उत्पादन प्रबंधन पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने की अनुमति भी प्रदान की गई।
गौरतलब है कि पहले कृषि विश्वविद्यालय में पीएचडी करने के लिए आवेदक विद्यार्थी के 10वीं से लेकर एमएससी तक की मार्कशीट में प्राप्त नंबरों के आधार पर मेरिट लिस्ट निकाली जाती थी। इसके बाद लिस्ट के आधार पर साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता और उसके बाद फिर से साक्षात्कार मेरिट लिस्ट निकलती। अब छात्रों को साक्षात्कार से पहले लिखित परीक्षा का भी सामना करना पड़ेगा।